जल्द पकने वाली सरसों की नई किस्म
पिछले पांच वषरें में मैदान क्षेत्र में इस नई किस्म का सफल परीक्षण हुआ है। सरसों की यह किस्म 98 से 121 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। साथ ही बीजों से 40 प्रतिशत से अधिक मात्रा में तेल निकलता है। वर्ष 2005-06 में इस नई किस्म का परीक्षण शुरू किया गया था, जिसके कारगर नतीजे सामने आए हैं। विश्वविद्यालय ने राज्य सरकार के सामने किसानों को इस सरसों के बीज प्रदान करने का प्रस्ताव रखा है।
यह नई किस्म कई खूबियों वाली भी है, एक हेक्टेयर में बुआई के लिए पांच किलो बीज पर्याप्त होता हैं। यह रोग रोधक किस्म है। इसे कम पानी की जरूरत होती है और इस पर सूखे का भी ज्यादा असर नहीं होता। एक साथ दो फसलें एवं एक साथ कई फसलें उगाने की विधि के लिए भी उपयुक्त है।
'राजमाता मस्टर्ड-1' नाम की यह किस्म बस्तर की सरसों से मेल खाती है। इसकी वजह यह है कि इस नई किस्म को तैयार करने के लिए बस्तर की सरसों में ही प्रयोग किया गया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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