सर्वदलीय बैठक के बाद होगा जम्मू-कश्मीर पर फैसला
एके एंटनी ने कहा "हम एएफएसपीए पर जल्द ही कोई फैसला लेंगे। इस बारे में बुधवार को सभी राजनीतिक दलों की बैठक होनी है। इसके बाद ही इस संबंध में कोई न कोई फैसला किया जाएगा। किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले सबकी राय ली जाएगी।"
गौरतलब है कि रक्षा मंत्री ने कश्मीर पर सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीएस) की बैठक के एक दिन बाद या बयान दिया है। बैठक में राज्य से एएफएसपीए को हटाने पर भी चर्चा हुई थी। एंटनी से पूछा गया कि आखिर तीन घंटे की चर्चा के बाद सीसीए बैठक में कश्मीर पैकेज और खासतौर पर एएफएसपीए को हटाने लेकर कोई फैसला क्यों नहीं हो सका? रक्षामंत्री ने कहा, "गंभीर मुद्दों पर फैसला सभी पक्षों पर विचार करने के बाद ही लिया जाता है।"
एएफएसपीए पर दोनों पक्ष
उल्लेखनीय है कि, एएफएसपीए के अंतर्गत सैन्य अधिकारियों को उनके फैसलों के लिए कानूनी संरक्षण मिलता है। इस अधिनियम के अंतर्गत किसी भी सैन्य अधिकारी को अपने फैसले के लिए सजा, मुकदमा या फिर किसी अन्य प्रकार की कानूनी कार्रवाई नहीं झेलनी पड़ती है।
एक तरफ जहां घाटी के अलगाववादी नेता एएफएसपीए को हटाने की पुरजोर मांग कर रहे हैं वहीं सेना ने इसे हटाए जाने का विरोध किया है। सेना के साथ-साथ प्रमुख राजनीति दल भाजपा ने भी एएफएसपीए को हटाए जाने का विरोध किया है। भाजपा का कहना है कि एएफएसपीए को हटाने से घाटी में तैनात सैनिकों का मनोबल गिरेगा।
जम्मू एवं कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी घाटी के कुछ क्षेत्रों में एएफएसपीए को हटाने की मांग को केंद्र सरकार के समक्ष रख चुके हैं। इन इलाकों में 11 जून से जारी हिंसक घटनाओं में मरने वालों की संख्या 88 तक पहुंच चुकी है।
इस बीच, वायु सेना प्रमुख मार्शल पीवी नाइक ने पत्रकारों से कहा, "अगर आप चाहते हैं कि सैनिक अपने कर्तव्यों के साथ भरपूर न्याय करें तो इसके लिए उन्हें कानूनी संरक्षण दिया जाना जरूरी है।" नाइक ने भरोसा जताया कि सरकार इस मामले को लेकर सही फैसला करेगी। बकौल नाइक, "मेरा मानना है कि सरकार इस मामले को लेकर काफी सजग है और वह सही फैसला करेगी।"













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