हिंदी ने देश को जोड़ा है : अम्बिका सोनी

सोनी ने मंगलवार को हिंदी दिवस के अवसर पर भास्कर फाउंडेशन द्वारा 'अंग्रेजी का बढ़ता प्रभाव और हिंदी प्रिंट मीडिया की भूमिका' विषय पर आयोजित संगोष्ठी में कहा कि हिंदी ने देश को एक सूत्र में पिरोया है। दुनिया के लोग अब भारत की ओर देख रहे हैं। इसे संभाल कर रखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षो में हिंदी के अखबारों का तेजी से विकास हुआ है।

सोनी ने कहा कि दिल की भाषा केवल मातृ भाषा हो सकती है। हिंदी को समृद्ध बनाने के लिए इसमें अन्य भाषाओं के शब्दों को भी जोड़ा जाना चाहिए।

हिंदी साहित्य के प्रख्यात आलोचक नामवार सिंह ने कहा कि हिंदी को बाजारु भाषा न बनाया जाए। बाजार के बढ़ते प्रभाव के चलते इसमें मिलावट बढ़ रही है, जिससे इसकी प्रकृति पर असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि टेलीविजन और अन्य इलेक्ट्रानिक माध्यमों के कारण हिंदी के स्वरूप में बदलाव आया है।

संगोष्ठी में एक अन्य वक्ता आईबीएन-18 नेटवर्क के प्रधान संपादक राजदीप सरदेसाई ने कहा कि बाजार से जुड़ने की वजह से हिंदी पत्रकारिता में काम करने वाले लोगों में एक आत्मविश्वास आया है, लेकिन इसके कारण यह सनसनी पैदा करने वाली एक भाषा बन गई है।

देसाई ने कहा कि हिंदी के पतन के लिए अंग्रेजी भाषा जिम्मेदार नहीं। इसका दोषी देश का मध्यम वर्ग है, जो अपनी आकांक्षाओं को अंग्रेजी के जरिए हासिल करना चाहता है।

अंग्रेजी के बढ़ते प्रभाव के सवाल पर संस्कृत एवं स्पैनिश के विद्वान ऑस्कर पुजोल ने कहा कि हिंदी को एक प्रतिष्ठित भाषा का दर्जा दिलाने के लिए भारतवासियों को उपनिवेशवादी मानसिकता से उबरना होगा।

वहीं लेखक एवं संघ लोक सेवा आयोग के सदस्य प्रोफेसर पुरुषोत्तम अग्रवाल ने कहा कि हिंदी में सर्जनात्मक साहित्य की रचना तो की गई, लेकिन भाषा को लेकर किसी विश्लेणात्मक अध्ययन पर काम नहीं किया गया। लिहाजा हिंदी लिखने और बोलने वालों में आत्मविश्वास की कमी देखी जाती है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+