कॉफी उत्पादन में 9.9 फीसदी की गिरावट
कुन्नूर (तमिलनाडु), 14 सितम्बर (आईएएनएस)। दक्षिण के राज्यों में पिछले एक दशक में कॉफी उत्पादन में आई भारी गिरावट पर 'द युनाइटेड प्लांटर्स एसोसिएशन ऑफ साउदर्न इंडिया' (उपासी) ने गहरी चिंता जताई है।
उपासी के अध्यक्ष टीवी अलेक्जेंडर ने मंगलवार को आईएएनएस को बताया, "कॉफी उत्पादन में आई यह गिरावट चिंताजनक है। वर्ष 2000 से इसके उत्पादन में 9.9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।"
दक्षिण भारत के प्रमुख कॉफी उत्पादक राज्यों कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में 'अरेबिका बीन्स' के उत्पादन में प्रति हेक्टेयर 16.2 प्रतिशत और 'रोबुस्टा बीन्स' के उत्पादन में 7.2 प्रतिशत की कमी आई है।
अलेक्जेंडर ने बताया कि भारत में कॉफी उत्पादन का औसत विश्व स्तर पर भी कम हुआ है। वर्ष 2008 में भारत में कॉफी का उत्पादन 766 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर था। कॉफी का उत्पादन करने वाले नए देश वियतनाम और ब्राजील भारत से क्रमश: ढाई गुना और डेढ़ गुना अधिक उत्पादन कर रहे हैं।
तीन राज्यों में कॉफी की उत्पादकता बढ़ाने के लिए हुए एक अध्ययन में कॉफी उत्पादकों को पौधों की गुणवत्ता में सुधार, खासकर 'अरेबिका' के नए पौधे लगाने और कीड़ों को मारने के लिए अच्छे कीटनाशकों का इस्तेमाल करने का सुझाव दिया गया है।
अलेक्जेंडर ने बताया कि 95 प्रतिशत कॉफी का उत्पादन करने वाले छोटे किसानों को राहत पहुंचाने के लिए सरकार ने कॉफी कर्ज राहत के रूप में 241 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है।
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने कॉफी उत्पादकों को राहत पहुंचाने के लिए उन्हें कर्ज पर राहत और कॉफी की खेती का बीमा करने का निर्णय लिया है।
बेंगलुरू में 10 दिसंबर को इस स्कीम की शुरुआत के अवसर पर केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने ने कहा था कि बारिश से कॉफी को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए सरकार ने कॉफी का बीमा करना शुरू किया है।
उन्होंने कहा था कि कॉफी को बारिश से होने वाले नुकसान से किसानों को बचाने के लिए दुनिया में यह अपनी तरह की पहली बीमा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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