एएफएसपीए पर फैसला सभी दलों के साथ बैठक के बाद : एंटनी (लीड-1)
नई दिल्ली, 14 सितम्बर (आईएएनएस)। रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी ने मंगलवार को कहा कि सरकार बुधवार को सभी राजनीति दलों के साथ होने वाली बैठक के बाद जम्मू एवं कश्मीर को राहत-पैकेज देने के बारे में फैसला करेगी। इसके अंतर्गत मुख्य रूप से राज्य से सशस्त्र सेना विशेष शक्तियां अधिनियम (एएफएसपीए) को हटाया जाना शामिल है।
राजधानी में आयोजित वायु सेना के एक समारोह के बाद रक्षा मंत्री ने पत्रकारों से कहा, "हम एएफएसपीए पर जल्द ही कोई फैसला लेंगे। इस बारे में बुधवार को सभी राजनीतिक दलों की बैठक होनी है। इसके बाद ही इस संबंध में कोई न कोई फैसला किया जाएगा। किसी भी नजीते पर पहुंचने से पहले सबकी राय ली जाएगी।"
रक्षा मंत्री का यह बयान हिंसाग्रस्त कश्मीर घाटी की स्थिति पर चर्चा के लिए आयोजित सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीएस) की बैठक के एक दिन बाद आया है। उस बैठक में राज्य में से एएफएसपीए को हटाने पर भी चर्चा हुई थी।
यह पूछे जाने पर कि आखिर तीन घंटे की चर्चा के बाद सीसीए बैठक में कश्मीर पैकेज और खासतौर पर एएफएसपीए को हटाने लेकर कोई फैसला क्यों नहीं हो सका? रक्षामंत्री ने कहा, "गंभीर मुद्दों पर फैसला सभी पक्षों पर विचार करने के बाद ही लिया जाता है।"
"सोमवार को हमने इस संबंध में लंबी बैठक की। हमने फैसला किया कि इस बारे में किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले हमें प्रमुख राजनीतिक दलों को भरोसे में लेना चाहिए। आप चिंता मत करें। हम बुधवार को इस संबंध में फैसला करेंगे।"
एएफएसपीए के कारण सैन्य अधिकारियों को उनके फैसलों को लेकर कानूनी संरक्षण मिलता है। इस अधिनियम के अंतर्गत किसी भी सैन्य अधिकारी को अपने फैसले को लेकर सजा, मुकदमा या फिर किसी अन्य प्रकार की कानूनी कार्रवाई नहीं झेलनी पड़ती है।
एक तरफ जहां घाटी के अलगाववादी नेता एएफएसपीए को हटाने की पुरजोर मांग कर रहे हैं वहीं सेना ने इसे हटाए जाने का विरोध किया है। सेना के साथ-साथ प्रमुख राजनीति दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी एएफएसपीए को हटाए जाने का विरोध किया है। भाजपा का कहना है कि एएफएसपीए को हटाने से घाटी में तैनात सैनिकों का मनोबल गिरेगा।
जम्मू एवं कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने घाटी के कुछ क्षेत्रों में एएफएसपीए को हटाने की मांग की है। इन इलाकों में 11 जून से जारी हिंसक घटनाओं में मरने वालों की संख्या 88 तक पहुंच चुकी है।
इस बीच, जम्मू एवं कश्मीर में एएफएसपीए को हटाने को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच वायु सेना प्रमुख ने मंगलवार को सैनिकों को कानूनी संरक्षण दिए जाने की वकालत की।
एक कार्यक्रम के दौरान वायु सेना प्रमुख मार्शल पी.वी.नाइक ने पत्रकारों से कहा, "अगर आप चाहते हैं कि सैनिक अपने कर्तव्यों के साथ भरपूर न्याय करें तो इसके लिए उन्हें कानूनी संरक्षण दिया जाना जरूरी है।"
नाइक ने भरोसा जताया कि सरकार इस मामले को लेकर सही फैसला करेगी। बकौल नाइक, "मेरा मानना है कि सरकार इस मामले को लेकर काफी सजग है और वह सही फैसला करेगी।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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