गया में विदेशियों के लिए बन रहे बांस के कॉटेज
आगामी 23 सितम्बर से प्रारंभ होने वाले पितृपक्ष में पिण्डदान करने के लिए देश-विदेश के लाखों लोग जुटेंगे।
राज्य पर्यटन विभाग के निदेशक विनय कुमार ने मंगलवार को बताया, "गया में पिण्डदान के लिए सैकड़ों विदेशी हर साल आते हैं। इस वर्ष विदेशियों को ठहरने के लिए बांस से बने 30 कॉटेज तैयार करवाए जा रहे हैं। झोपड़ीनुमा बांस के बने इन कॉटेजों में दो कमरे होंगे जो पूरी तरह अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस और वातानुकूलित होंगे।" असम के कारीगरों द्वारा तैयार किए जा रहे ये कॉटेज कुछ ही दिनों में तैयार हो जाएंगे।
गौरतलब है कि पर्यटन विभाग ने विश्व प्रसिद्ध सोनपुर मेले के दौरान भी विदेशी सैलानियों के लिए इस प्रकार के कॉटेज तैयार करवाए थे, जिससे विभाग को अतिरिक्त लाभ हुआ था।
कुमार के मुताबिक पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष भी लोग घर बैठे ऑन लाइन पिण्डदान कर सकेंगे। पिछले वर्ष सैकड़ों लोगों ने ऑन लाइन पिण्डदान किया था।
उल्लेखनीय है कि आत्मा, प्रेतात्मा तथा परमात्मा में विश्वास करने वाले लोग आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से पूरे पक्ष की समाप्ति तक गया में आकर पिण्डदान करते हैं। गया में 45 वेदियां हैं जहां लोग पिण्डदान कर अपने पूर्वजों का श्राद्ध करते हैं। मान्यता है कि भगवान श्रीराम अपनी पत्नी सीता के साथ यहां आए थे और उन्होंने अपने पिता दशरथ समेत सभी पूर्वजों का पिण्डदान किया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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