घरों में घुसा पानी, छतों पर जिंदगी बसर करने को मजबूर
नई दिल्ली, 14 सितम्बर (आईएएनएस)। अनवरत जारी बारिश, खतरे के निशान को पार कर लगातार बढ़ती-घटती यमुना और गंदे नालों के पानी ने दिल्ली के निचले इलाकों में रहने वाले हजारों लोगों की जिंदगी को नरक में तब्दील कर दिया है।
ऐसे में जबकि यमुना और नालों का पानी घरों में घुस चुका है, हजारों लोग ऊंची सड़कों और अपने घरों की छतों पर जिंदगी बसर करने को मजबूर हैं। उनका खाना-पीना और सोना-जागना यहीं होता है।
उत्तरपूर्व दिल्ली का यमुना बाजार बारिश और बाढ़ के कहर का सबसे बड़ा निशाना बना है। इस इलाके में घुटने तक पानी भरा है। यहां के निवासी तो मानों इस स्थिति के आदी हो चुके हैं। घरों की बालकनी में खड़े होकर वे इस स्थिति का लुत्फ उठाते दिखते हैं लेकिन इस इलाके के व्यवसायियों का बुरा हाल है। कई दिनों से उनकी दुकानें बंद पड़ी हैं। जिसने अपनी दुकान खोल रखी है, वह आधे सूखे आधे गीले हालात में काम कर रहा है।
इस इलाके में परचून की दुकान चलाने वाले नीरज लाल बताते हैं, "पानी दोबारा बरसा तो हमें अपनी दुकानें बंद करनी होंगी। हमारे इलाके में जलजमाव कोई नई बात नहीं। इस इलाके में करीब 15 दुकानें है और उनमें से अधिकांश बंद हैं। हमें काफी नुकसान हो रहा है।"
स्थानीय निवासियों के मुताबिक दिल्ली नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी इस इलाके में अक्सर आते रहते हैं लेकिन किसी के पास जलजमाव की इस समस्या का स्थाई समाधान नहीं है।
स्थानीय नागरिक निहाल चंद शर्मा कहते हैं, "नगर निगम के अधिकारी यहां तक की एसडीएम भी यहां आ चुके हैं। उन्होंने यहां पम्प लगाने की बात कही है लेकिन तीन महीने बीत जाने के बावजूद उन्होंने अपनी बात पर अमल नहीं किया है।"
"आलम यह है कि पानी हमारे घरों में घुस चुका है। हम पहली मंजिल पर रहने को मजबूर हैं। जिनके घर एक मंजिला हैं, उनके लिए तो बड़ी समस्या है। इसमें अगर बिजली का कोई तार टूटकर पानी में गिर जाता है तो आप खुद ही अंदाजा लगाइए की जिंदगी का कितना पड़ा नुकसान होगा।"
जिन लोगों के घरों में पानी पूरी तरह घुस चुका है, उन्हें नगर निगम की ओर से टेंट मुहैया कराए गए हैं। इन टेंटों के साथ दो फोल्डिंग चारपाई भी है। पिछले छह दिन से एसडीएम के दफ्तर के 10 कर्मचारी पानी निकालने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन इसका कोई फल सामने नहीं आया है।
यमुना घाट के करीब स्थित निगमबोध घाट में दाहसंस्कार का काम होता है। इस जगह का भी बुरा हाल है। पानी भरे होने के कारण सीमित संख्या में शवों को जलाया जा रहा है। ऐसे में यहां पहुंचने वाले शवों को अपनी बारी का काफी लम्बा इंतजार करना पड़ रहा है। रविवार को तो इस घाट पर एक भी शवदाह नहीं किया जा सका।
ऐसी ही हालत पास में स्थित नेपाली पार्क का है। आईएसबीटी के करीब स्थित इस जगह पर 25 से 30 लोग पैदल चलने वालों के लिए बनी सड़क पर रहने को मजबूर हैं। इनका कहना है कि इनके घरों में पानी भर चुका है और अब इनके पास सड़क पर रहने के अलावा और कोई चारा नहीं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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