असम में ब्रह्मपुत्र खतरे के निशान से ऊपर, स्थिति चिंताजनक
एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि राज्य के 10 जिलों में बाढ़ की स्थिति है। इनमें लखीमपुर, धेमाजी, मोरीगांव, गोलाघाट और बारपेट बुरी तरह प्रभावित हैं। इस सप्ताह के शुरू में पूर्वी असम में बाढ़ से बचने की कोशिश करने की अलग-अलग घटनाओं में दो लोग डूब गए थे।
एक जिला अधिकारी ने कहा, "अब तक 10 जिलों के 500 से ज्यादा गांव बाढ़ में बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।" गुवाहाटी से करीब 400 किलोमीटर की दूरी पर स्थित लखीमपुर जिले से ही करीब 100,000 लोग विस्थापित हुए हैं।
उन्होंने कहा, "बाढ़ प्रभावित लोगों में से ज्यादातर ने ऊंचे रेलवे प्लेटफार्मो, रेल लाइनों और अब तक बाढ़ से अप्रभावित रहे सरकारी स्कूलों और कार्यालयों में आश्रय लिया है।"
केंद्रीय जल आयोग के एक बुलेटिन में कहा गया है कि ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियां कम से कम आठ स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।
बाढ़ के पानी से राज्य के कम से कम चार महत्वपूर्ण तटबंध टूट गए हैं।
जोरहाट जिले का मजूली द्वीप भी बाढ़ से प्रभावित है। सोमवार रात एक तटबंध के टूटने के कारण यहां पहुंचे पानी ने हजारों लोगों के लिए परेशानी खड़ी कर दी।
धेमाजी जिले के करीब 50 गांव भी बाढ़ की चपेट में हैं।
असम के राहत एवं पुनर्वास मंत्री भूमिधर बर्मन का कहना है कि चेतावनी जारी कर दी गई है और स्थिति से निपटने के लिए आपदा प्रबंधन दल तैयार हैं। प्रभावित जिलों में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति की जा रही है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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