कश्मीर हिंसा में 16 की मौत (राउंडअप इंट्रो-1)
श्रीनगर/चण्डीगढ़/नई दिल्ली, 13 सितम्बर (आईएएनएस)। हिंसा के दौर से गुजर रहे कश्मीर घाटी में सोमवार को अमेरिका में पवित्र कुरान के कथित अपमान की अफवाह फैलने के बाद सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुए संघर्ष में 16 लोगों की मौत हो गई। उग्र प्रदर्शनकारियों ने पूरी कश्मीर घाटी में सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया।
इस बीच कश्मीर के हालात की समीक्षा और शांति के उपाय तलाशने के लिए नई दिल्ली में सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीएस) की बैठक बुलाई गई।
बैठक में जम्मू एवं कश्मीर के लोगों से, खासतौर से युवकों से शांति की अपील की गई। सरकार ने राज्य के लोगों के साथ संवाद प्रक्रिया फिर से शुरू करने की भी बात कही।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई सीसीएस की बैठक में उम्मीद जाहिर की गई कि अविश्वास और अराजकता जैसे मुद्दों को बातचीत से हल कर लिया जाएगा।
तीन घंटे की बैठक के बाद जारी एक बयान में कहा गया है, "सीसीएस ने जम्मू एवं कश्मीर में विभिन्न वर्ग के लोगों के साथ संवाद प्रक्रिया फिर से शुरू करने के सरकार के इरादे को दोहराया। सीसीएस ने 15 सितंबर, बुधवार को नई दिल्ली में एक सर्वदलीय बैठक बुलाने का निर्णय लिया।"
बयान में कहा गया है, "सरकार को उम्मीद है कि सर्वदलीय बैठक के बाद वह जम्मू एवं कश्मीर के लोगों के साथ बातचीत करने तथा खास पहल व उपायों को अपनाने की स्थिति में आ जाएगी, जिससे राज्य के लोगों में विश्वास पैदा होगा।"
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के सात रेस कोर्स स्थित सरकारी आवास पर चली तीन घंटे की बैठक के बाद गृह सचिव जी.के.पिल्लै ने एक पृष्ठ का यह बयान जारी किया।
उधर, सोमवार की हिंसा के दौरान तंगमार्ग कस्बे में एक ईसाई मिशनरी के स्कूल को आग लगा दिया गया। इस घटना में छह लोगों की मौत हो गई। सात लोग बडगाम में मारे गए, जबकि पंपोर और बांदीपोरा में एक-एक व्यक्ति मारे गए हैं।
सूत्रों ने बताया कि दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग कस्बे में विरोध प्रदर्शन के दौरान मरूफ अहमद नाथ नामक एक युवक को सुरक्षा कर्मियों ने कथित रूप से दौड़ाया। इस दौरान उसने झेलम नदी में छलांग लगा दी और डूब गया। पुलिस ने शव मिलने तक उसके मौत की पुष्टि करने से इंकार कर दिया है।
सोमवार की मौतों के बाद 11 जून से शुरू हुई हिंसा में मरने वालों की संख्या बढ़ कर 86 हो गई है।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला सोमवार को पूरे दिन नई दिल्ली में रहे और इस दौरान उन्होंने गृह मंत्री पी.चिदंबरम और सोनिया गांधी से मुलाकात की। लेकिन हिंसा की ताजा खबरों के बाद वह श्रीनगर लौट गए और वह वहां अपने कैबिनेट की एक आपात बैठक कर रहे हैं।
ज्ञात हो कि श्रीनगर और घाटी के अन्य प्रमुख शहरों में दो दिनों से जारी 24 घंटे के कर्फ्यू के बावजूद हिंसा भड़की है, जबकि पंजाब के हिंसाग्रस्त इलाके में कर्फ्यू लगाना पड़ा है।
ऐसे में संवेदनशीन इलाकों में साम्प्रदायिक हिंसा की आशंका के मद्देनजर केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों को अलर्ट कर दिया है वहीं अमेरिका ने हिंसा पर निराशा जताते हुए कुरान का अनादर किए जाने की घटना की निंदा की है और कहा है कि यह अनुचित, असहिष्णु, विभाजनकारी और अमेरिकी मूल्यों के खिलाफ है। इस बीच अफवाह को फैलाने वाले ईरानी चैनल प्रेस टीवी के प्रसारण पर जम्मू एवं कश्मीर सरकार ने रोक लगा दी है।
उत्तरी कश्मीर का तंगमर्ग हिंसा से सबसे ज्यादा प्रभावित रहा। वहां एक हिंसक भीड़ ने एक ईसाई मिशनरी स्कूल को आग लगा दी और समाज कल्याण विभाग के एक कार्यालय व एक वाहन को आग के हवाले कर दिया। इस दौरान कस्बे में कम से कम छह लोग मारे गए।
तंगमर्ग में मरने वालों की पहचान अब्दुल कयूम, तारिक अहमद गनाई, मुहम्मद इकबाल मलिक, मुदासिर अहमद र्पी, अब्दुल माजिद और अफाक अहमद शामिल हैं।
तंगमर्ग अस्पताल के चिकित्सकों ने कहा है कि 36 से अधिक घायल नागरिकों को वहां भर्ती कराया गया है। उनमें से कई सारे को गोली लगी है। एक चिकित्सक ने कहा, "हम अधिकांश घायलों को इलाज के लिए श्रीनगर भेज रहे हैं।"
मध्य बड़गाम जिले में एक महिला और एक सात वर्षीय बच्चे सहित सात लोग मारे गए हैं। मृत महिला की पहचान रफीका बानों के रूप में हुई है, वहीं बच्चे की पहचान दानिश नबी के रूप में। बच्चा चरारे शरीफ में मारा गया।
बड़गाम में मारे गए अन्य लोगों में गुलाम रसूल तांत्रे, निसार अहमद कुचय, आदिल अहमद लोन, शौकत अहमद मीर और पुलिस कांस्टेबल देवेंद्र सिंह शामिल हैं। सिंह पर प्रदर्शनकारियों ने एक ट्रक चढ़ा दिया और उनकी मौत हो गई।
एक पुलिस अधिकारी ने बताया, "घायल कांस्टेबल को बड़गाम अस्पताल ले जाया गया जहां उसने दम तोड़ दिया।" कांस्टेबल को अस्पताल पहुंचाने वाले वाहन को अस्पताल के बाहर मौजूद भीड़ ने पलट दिया और उसको आग लगा दी।
श्रीनगर के ओमपोरा, शालतेंग और बेमिना में भी बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों ने यहां लगाए गए चौबीसों घंटे के कर्फ्यू का उल्लंघन किया। अमेरिका-विरोधी प्रदर्शन जम्मू सहित हमहमा, ओमपोरा, शालतेंग, शालीमार, न्यूथेड और श्रीनगर के अन्य स्थानों में हुए।
दक्षिणी कश्मीर के पुलवामा जिले और श्रीनगर के शालीमार क्षेत्र में सैंकड़ों ग्रामीणों ने अमेरिका के विरोध में नारेबाजी की। लोगों के अनुसार एक ईरानी टीवी चैनल ने रविवार को घोषणा की कि पवित्र कुरान की एक प्रति अमेरिका में जलाई गई है।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, "पूरे श्रीनगर शहर, दक्षिणी कश्मीर के अनंतनाग, पुलवामा बिज्बेहारा और उत्तरी कश्मीर के बारामूला एवं सोपोर में कर्फ्यू जारी है। पूरी घाटी में हालात काबू में हैं।" गत 11 जून से घाटी में जारी हिंसा के ताजा दौर के बाद पहली बार यहां चौबीसों घंटे का कर्फ्यू लगाया गया है।
इधर, नई दिल्ली अमेरिका के राजदूत टिमोथी रोमर ने एक बयान में कहा, "किसी भी पवित्र पुस्तक को जानबूझकर अपमानित करना घृणित कार्य है।"
केंद्र सरकार ने कश्मीर और पंजाब में भड़की हिंसा के बाद साम्प्रदायिक तनाव की आशंका के मद्देनजर राज्यों को सतर्क कर दिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मंत्रालय ने राज्य सरकारों को साम्प्रदायिक रूप से संवेदनशील इलाकों पर नजर रखने कहा है। अधिकारी ने कहा कि केंद्र सरकार जम्मू एवं कश्मीर प्रशासन के लगातार संपर्क में है।
जम्मू एवं कश्मीर के मुख्य सचिव एस.एस. कपूर ने संवाददाताओं से कहा, "हमने लोगों से अपील की है कि वे सच्चाई जाने बगर किसी खबर पर यकीन न करें, क्योंकि सिर्फ प्रेस टीवी पर कथित रूप से पवित्र कुरान को अपवित्र किए जाने की खबर प्रसारित की गई है, दुनिया के किसी और समाचार चैनल पर नहीं।"
मुख्य सचिव ने कहा कि किसी भी राष्ट्रीय टेलीविजन चैनल ने कथित तौर पर कुरान को अपवित्र करने की खबर प्रसारित नहीं की है, क्योंकि यह खबर अपुष्ट है।
उधर, हिंसा की घटनाओं के बाद पंजाब के मलेरकोटला शहर में कर्फ्यू लगाना पड़ा। हिंसा रविवार देर रात यह अफवाह फैलने पर भड़की। आनन-फानन में ही भीड़ जमा हो गई और अमेरिकी सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए शहर के इकलौते गिरजाघर की ओर बढ़ गई। पुलिस के दखल देने से पहले ही भीड़ ने गिरजाघर के फर्नीचर को फूंक डाला।
इस बीच जम्मू एवं कश्मीर मंत्रिमंडल ने कुरान अपवित्र किए जाने संबंधी खबर की सोमवार को निंदा की और लोगों से शांति की अपील की।
बैठक के बाद यहां जारी एक बयान में कहा गया, "पवित्र कुरान को अपवित्र किए जाने की कथित कार्रवाई की निंदा करने में कैबिनेट एक मत था। कैबिनेट ने इस कारण लोगों की भावना को पहुंची ठेस के प्रति भी अपनी पूर्ण सहमति जताई।"
इसके साथ ही कैबिनेट ने जनता से आग्रह किया कि उन्हें विरोध प्रदर्शन के दौरान कानून को अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि "इसके कारण अनावश्यक रूप से जान-माल का नुकसान ही होता है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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