स्वदेश नहीं लौट पा रही भारतीय नर्स
लक्ष्मी कृष्णकुमार
नई दिल्ली, 13 सितम्बर (आईएएनएस)। कुवैत में एक भारतीय नर्स बुरी तरह बीमार है और स्वदेश वापसी को लेकर बुरी तरह बेताब है। उसके नियोक्ता ने उसके खिलाफ छह मामले दर्ज कराए हैं, और कुवैत सरकार ने उसकी यात्रा पर रोक लगा दी है। अब प्रवासी भारतीय मामलों का मंत्रालय उसकी मदद करने में जुटा है।
केरल की रहने वाली लिजिमोल जार्ज (30) ने कुवैत से आईएएनएस को बताया, "लगता है मैं अब कभी घर नहीं जा पाऊंगी। मुझसे अरबी भाषा के दस्तावेजों पर दस्तखत करा लिए गए हैं। मुश्किलों में फंसे मेरे पति की नौकरी भी जाने वाली है।"
अगस्त 2008 में लिजिमोल की शादी कुवैत में होटल में काम करने वाले जिनेश के.जे. से हुई थी। शादी के बाद तीसरे महीने में लिजिमोल की तबियत बिगड़ गई। उसने अपने नियोक्ता कॉस्मेटिक क्लिनिक के संचालक डॉ. तलाल सुलेमान फलाह अल अली से छुट्टी मांगी। लेकिन डॉ. तलाल ने उसे बीमारी की हालत में भी काम करने के लिए बाध्य किया। दिसंबर, 2008 में वह क्लिनिक में काम करते समय बेहोश हो गई, उसे अस्पताल पहुंचाया गया जहां उसका गर्भपात हो गया।
लिजिमोल ने बताया, "गर्भपात और काम के दबाव ने मुझे काफी चोट पहुंचाई। इसी दौरान रसोई घर में काम करते हुए मैं बुरी तरह से जल गई। मैं अभी भी इससे ऊबर नहीं पाई हूं।"
अपना इलाज भारत में कराने के लिए लिजिमोल ने इस्तीफा दिया तो डॉ. तलाल ने उसे अस्वीकार कर दिया। इस पर वह अपने पति के साथ मदद के लिए भारतीय दूतावास पहुंची। दिसंबर, 2008 में दूतावास ने डॉ. तलाल से इस मामले को सुलझाने की कोशिश की।
लेकिन प्रवासी भारतीय मामलों के मंत्रालय के अनुसार डॉ. तलाल ने सहयोग करने से इंकार कर दिया और लिजिमोल के खिलाफ जालसाजी का मामला दर्ज करा दिया। साथ ही लिजिमोल के यात्रा पर पाबंदी लगा दी गई।
बाद में डॉ. तलाल ने लिजिमोल पर पांच और मामले दर्ज करा दिए। उधर, भारत में लिजिमोल के परिवार वाले अपनी बेटी की रिहाई के लिए भारत सरकार के साथ संपर्क में हैं। भारतीय दूतावास ने लिजिमोल के लिए वकील की व्यवस्था की है, जो उसका मामला देख रहा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications