वीजा शुल्क मसले को बातचीत से हल करेगा भारत
नई दिल्ली, 13 सितम्बर (आईएएनएस)। अमेरिका द्वारा वीजा शुल्क में की गई बढ़ोतरी और आउटसोर्सिग पर लगाई गई पाबंदी के खिलाफ विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के न्यायालय में जाने की भारत की कोई योजना नहीं है। भारत का कहना है कि वह इन मुद्दों को द्विपक्षीय बातचीत के जरिए हल करेगा।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव डी.के. मित्तल ने सोमवार को पत्रकारों को बताया, "हमलोग इस बारे में पहले ही शिकायत कर चुके हैं। बातचीत सही दिशा में चल रही है, और हमें उम्मीद है कि इस मसले को शीघ्र ही द्विपक्षीय तरीके से सुलझा लिया जाएगा।"
उन्होंने कहा कि इस मामले को निपटाने के लिए विश्व व्यापार संगठन का न्यायालय अंतिम विकल्प होगा। अतिरिक्त सचिव ने कहा, "आप सभी मुद्दों को डबल्यूटीओ नहीं ले जा सकते। हमारी प्राथमिकता इस मुद्दे को द्विपक्षीय बातचीत से निपटाने की हैं।"
गौरतलब है कि अमेरिकी सरकार ने हाल ही में एच-1बी वीजा शुल्क में 2,000 डॉलर और एल-1ए व एल-1बी वीजा शुल्क में 2,250 डॉलर की बढ़ोतरी की है। भारत सरकार ने इस बढ़ोतरी को विश्व व्यापार संगठन के व्यापार नियमों के खिलाफ बताया है।
अमेरिका राज्य के ओहियो फैसले, में सरकारी विभागों द्वारा सूचना तकनीकी (आईटी) सेवाओं की आउटसोर्शिग पर रोक लगाने की बात कही गई है। भारत सरकार ने अमेरिका के इस निर्णय की भी आलोचना की है।
मित्तल ने कहा, "इसमें कोई संदेह नहीं है कि निर्णय अपने व्यापारिक हितों को देखते हुए लिए गए हैं।"
गौरतलब है कि वाणिज्य और उद्योग मंत्री आनंद शर्मा अपने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अगले सप्ताह अमेरिका के दौरे पर जाएंगे। शर्मा इन मुद्दों को राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रशासन और कानून निर्माताओं के समक्ष उठाएंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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