कश्मीर में विरोध प्रदर्शन, युवक की मौत (लीड-1)
श्रीनगर, 13 सितम्बर (आईएएनएस)। जम्मू एवं कश्मीर के उत्तरी बांदीपोरा में प्रदर्शनकारियों की भीड़ पर सुरक्षाबलों की गोलीबारी में एक युवक की मौत हो गई और एक अन्य बुरी तरह घायल हो गया। इसके साथ कश्मीर में जारी हिंसा के ताजा दौर में मरने वालों की संख्या बढ़कर 71 हो गई। अमेरिका में पवित्र कुरान के अनादर की अफवाह फैलने के बाद यहां प्रदर्शनकारी कर्फ्यू का उल्लंघन कर सड़कों पर उतरे।
एक पुलिस अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, "बांदीपोरा के आजस गांव में बेकाबू भीड़ पर सुरक्षा बलों की गोलीबारी में निसार अहमद भट नाम के एक प्रदर्शनकारी की मौत हो गई और एक अन्य गंभीर रूप से घायल हो गया।"
उन्होंने बताया, "क्षेत्र में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं और सुरक्षा बल उन्हें काबू में करने की कोशिश कर रहे हैं।"
रपटों में कहा गया है कि सुरक्षा बलों की गोलीबारी के दौरान भट और रियाज अहमद नाम का एक अन्य प्रदर्शनकारी घायल हो गए। भट ने अस्पताल ले जाए जाते समय दम तोड़ दिया।
भट की मौत के साथ घाटी में गत 11 जून से जारी हिंसा के ताजा दौर में मरने वालों की संख्या 71 हो गई है।
कश्मीर घाटी के प्रमुख शहरों में चौबीसों घंटे का कर्फ्यू जारी रहने के बीच अमेरिका में कुरान का अनादर होने संबंधी अफवाहों के कारण दक्षिणी कश्मीर के पुलवामा जिले के सैंकड़ों ग्रामीणों ने सोमवार सुबह कुरान के समर्थन और अमेरिका के विरोध में नारेबाजी की। ऐसे ही प्रदर्शन श्रीनगर के शालीमार क्षेत्र में भी हुए।
स्थानीय लोगों के अनुसार एक ईरानी टीवी चैनल ने रविवार को घोषणा की कि पवित्र कुरान की एक प्रति अमेरिका में जलाई गई है। फ्लोरिडा के एक पादरी ने 9/11 के आतंकवादी हमलों की नौंवी बरसी पर कुरान की प्रति जलाने की धमकी भी दी थी।
इन विरोध प्रदर्शनों के दौरान भारत-विरोधी या सुरक्षाबलों के खिलाफ नारेबाजी नहीं हुई। जुलूस की अगुवाई कर रहे गांव के बुजुर्गो से यह सुनिश्चित करने की कोशिश की कि अमेरिका के खिलाफ गुस्सा, राज्य की पुलिस अथवा केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के खिलाफ भड़काऊ गतिविधियों में न तब्दील हो जाए।
मंजूर अहमद नाम के 55 वर्षीय ग्रामीण ने कहा, "ये पूरी तरह इस्लाम-समर्थक प्रदर्शन हैं और हमारी मांग है कि उन लोगों को कड़ी सजा दी जाए जिन्होंने पवित्र कुरान का अनादर किया है। दुनिया के किसी भी हिस्से में कोई भी मुसलमान मूक दर्शक बनकर कुरान का अनादर होते नहीं देख सकता। यह प्रदर्शन सीमाओं और राष्ट्रीयताओं से परे है।"
इस्लाम-समर्थक एवं अमेरिका-विरोधी प्रदर्शन श्रीनगर के हमहमा, ओमपोरा, शालतेंग, शालीमार, न्यूथेड और अन्य स्थानों तथा पुलवामा जिले में हुए।
प्रदर्शनकारियों ने बडगाम से श्रीनगर की ओर विशाल जुलूस भी निकाला।
इस बीच श्रीनगर और घाटी के अन्य प्रमुख शहरों में कर्फ्यू सोमवार को लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, "पूरे श्रीनगर शहर, दक्षिणी कश्मीर के अनंतनाग, पुलवामा बिज्बेहारा और उत्तरी कश्मीर के बारामूला एवं सोपोर में कर्फ्यू जारी है। पूरी घाटी में हालात काबू में हैं।"
गत 11 जून से घाटी में जारी हिंसा के ताजा दौर के बाद पहली बार यहां चौबीसों घंटे का कर्फ्यू लगाया गया है। इस हिंसा में अब तक 70 लोग मारे गए हैं।
पिछले तीन महीनों से प्रशासन संवदेनशील इलाकों में दिन में कर्फ्यू या प्रतिबंध लगाता था और रात होने पर पुलिस तथा सीआरपीएफ के कर्मी हटा लिए जाते थे। उस समय लोग रोजमर्रा की चीजें खरीद लिया करते थे।
उल्लेखनीय है कि शनिवार सुबह ईद की नमाज के बाद हिंसा भड़क उठी थी। हजारों लोगों ने मीरवाइज फारुख और जम्मू-कश्मीर लिब्रेशन फ्रंट के अध्यक्ष यासीन मलिक की अगुवाई में शहर के लालचौक इलाके तक जुलूस निकाला और आगजनी की। भीड़ ने हजरतबल में पुलिस की बैरकों को आग लगा दी। राज्य बिजली बोर्ड विभाग और जम्मू एवं कश्मीर पुलिस की अपराध शाखा के कार्यालयों को आग लगा दी गई थी। इसके बाद यहां कर्फ्यू लगा दिया गया। रविवार को भी भीड़ ने शिक्षा मंत्री पीरजादा मोहम्मद सईद के आवास पर हमला किया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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