'सीआरपीएफ चिकित्सकीय जांच प्रणाली की समीक्षा करे'
न्यायमूर्ति गीता मित्तल और न्यायमूर्ति जे. आर. मिधा की खण्डपीठ ने चिकित्सा विशेषज्ञों की गैर मौजूदगी में उम्मीदवारों को गलत तरीके से अयोग्य करार दिए जाने से संबंधित सामने आए कई मामलों के बाद यह आदेश दिया है।
अदालत ने कहा है कि भर्ती के दौरान बलों ने जो मेडिकल बोर्ड गठित किए हैं, उसमें चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञ नहीं रहे हैं।
खण्डपीठ ने कहा, "हमने पाया है कि हमारे आदेश पर गठित विशेषज्ञ चिकित्सकों के एक बोर्ड की रिपोर्ट, अर्धसैनिक बल के चिकित्सा बोर्ड द्वारा उम्मीदवारों को दिए गए चिकित्सकीय विफलता के प्रमाण पत्र से भिन्न है, उस बोर्ड से, जिसमें कोई विशेषज्ञ नहीं था।"
खण्डपीठ ने यह आदेश एक उम्मीदवार कमलेश कुमार द्वारा दायर याचिका पर दी है।
गौरतलब है कि सीआरपीएफ में सहायक कमांडेंट के उम्मीदवार कुमार को मेडिकल बोर्ड ने अयोग्य करार दे दिया था। लेकिन अदालत के हस्तक्षेप के बाद सिविल अस्पताल के विशेषज्ञों द्वारा स्वास्थ्य प्रमाण पत्र दिए जाने के बाद कुमार की भर्ती कर ली गई।
खण्डपीठ ने कहा, "इस तथ्य को देखते हुए लगता है कि प्रशासन को अपनी चार दशक पुरानी नीति में बदलाव करने की जरूरत है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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