उप्र में बाढ़ की कहर जारी, 3 लाख लोग प्रभावित
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में घाघरा नदी पर बने भिखारीपुर-सिकरौर व रेवली-आदमपुर तटबंध पर हो रहे तेज कटान से इनके टूटने का खतरा मंडरा रहा है। बाढ़ से पहले ही करीब तीन लाख आबादी प्रभावित हो चुकी है।
उफनाई घाघरा का जलस्तर गोंडा, बाराबंकी और बहराइच में खतरे के निशान से करीब 40 सेंटीमीटर ऊपर बना हुआ है। राजधानी लखनऊ सहित प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में लगातार बारिश का दौर जारी है।
गोंडा के सुजौली मुहम्मदपुर गांव के पास घाघरा नदी पर बने भिखारीपुर-सिकरौर तटबंध पर तेज बहाव से लगातार कटान जारी है। गोंडा के अपर जिलाधिकारी (वित्त) विवेक पांडे ने सोमवार को संवाददाताओं को बताया कि बांध को बचाने के लिए युद्धस्तर पर काम चल रहा है। पत्थर के बोल्डर व मिट्टी डालने का सिलसिला जारी है। उन्होंने कहा कि तेज बहाव के कारण थोड़ी दिक्कतें आ रही हैं, लेकिन हालात नियंत्रण में है। आस-पास के गांव के लोगों को सतर्क कर दिया गया है।
गोंडा के तरबगंज और कर्नलगंज तहसीलों के लगभग 100 गांव घाघरा के पानी से जलमग्न हैं और करीब डेढ़ लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। उधर, बहराइच में घाघरा नदी पर रेवली-आदमपुर तटबंध पर फिर से कटान तेज हो गया है। जिले के 90 गांव पहले ही जलमग्न हैं। जिला आपदा अधिकारी वीरेंद्र पांडे ने आईएएनएस को बताया कि कटान रोकने के प्रयास जारी हैं।
बारांबकी जिले में देवां तहसील के निकट रविवार देर शाम शारदा कैनाल टूट जाने से आस-पास के करीब 6 गांवों में पानी प्रवेश कर गया। बाराबंकी के अपर जिलाधिकारी (वित्त) देवेंद्र पांडे ने आईएएनएस को बताया कि शारदा कैनाल टूटने से करीब दो हजार आबादी प्रभावित हुई है। प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
मथुरा जिले में खतरे के निशान के ऊपर बह रही यमुना का पानी निचले इलाकों के करीब 10 गावों में प्रवेश कर गया है। लखीमपुर खीरी के करीब 20 गांव पहले से ही शारदा नदी के पानी से जलमग्न हैं। प्रभावित इलाकों में प्रशासन की तरफ से राहत व बचाव कार्य जारी है। अधिकारियों का कहना है कि बाढ़ प्रभावित बाराबंकी, गोंडा, बहराइच और लखीमपुर खीरी जिलों में अब तक कुल 20 मौतें हुई हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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