पंजाब और हरियाणा में कई गांवों में बाढ़
हिमाचल प्रदेश और उत्तराखण्ड में पिछले कुछ दिनों से हो रही बारिश की वजह से सतलुज, यमुना, मरक डा और तंगरी सहित अन्य नदियों का जलस्तर बढ़ जाने से बाढ़ का पानी आसपास के निचले इलाकों में प्रवेश कर गया है।
यमुनानगर के उपायुक्त अशोक सांगवान ने बताया कि राज्य में यमुनानगर जिले के 60 से अधिक गावों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया गया है और पीड़ितो को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
उन्होंने कहा, "बाढ़ की वजह से राष्ट्रीय राजमार्ग को भी नुकसान पहुंचा है जिससे सड़क यातायात प्रभावित हुआ है।"
सांगवान ने बताया कि प्रशासन की तरफ से सुरक्षा के सभी इंतजाम किए गए हैं। यमुना में पानी कम होना शुरू हो गया है लेकिन उसकी रफ्तार काफी धीमी है। यह पूरी तरह से आने वाले दिनों में बारिश की परिस्थतियों पर निर्भर करेगा।
बाढ़ का पानी अंबाला, पानीपत और सोनीपत जिलों के कुछ गांवों में भी प्रवेश कर गया है।
सोनीपत के उपायुक्त अजीत जोशी ने कहा, "यमुना खतरे के निशान के निकट पहुंच चुकी है जिससे आसपास के गांवों में बाढ़ की आशंका पैदा हो गई है। हम स्थिति पर लगातार नजर रख र हे हैं।"
उधर, पंजाब में रोपड़ जिले के आनंदपुर साहिब उपमंडल के दर्जनों गांवों में सतलुज नदी का पानी प्रवेश कर गया है। लोधीपुर गांव के निकट तटबंध में आई दरार के बाद इन गांवों में पानी प्रवेश कर गया है।
एक महीने पहले ही तटबंध में दरार पड़ी थी लेकिन प्रशासन इसे भरने में असफल साबित हुआ। दसग्रेन, बुर्ज, मेंहदी कलां, लोधीपुर और बाद्दल सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं।
भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) ने बांध के जलस्तर को सामान्य बनाए रखने के लिए गुरुवार को सतलुज नदी में 30,000 क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़ा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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