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'मुफ्त अनाज' पर सुप्रीम कोर्ट में उतरी केंद्र सरकार

नई दिल्ली। पीयूसीएल द्वारा दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के 'मुफ्त आनाज बांटो' निर्णय पर फटकार खा चुकी केंद्र सरकार ने मुफ्त अनाज ना बांट पाने की विवशता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट में सफाई पेश की।

केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अनाज की खरीदारी नीतियों की बारीकी समझाई। केंद्र सरकार के मुताबिक, भंडारण क्षमता के आधार पर खाद्यान्न की खरीददारी नहीं की जा सकती। इसके पीछे दो वजहें हैं, सरकार ने कहा कि खरीददारी नीति के दो उद्देश्य होते हैं। पहला उद्देश्य- किसानों को न्यूनतम समर्थन उपलब्ध कराना और दूसरा, सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए खाद्यान्न उपलब्ध कराना।

न्यायमूर्ति दलवीर भंडारी और न्यायमूर्ति दीपक वर्मा की खण्डपीठ के समक्ष दायर एक विस्तृत हलफनामे में सरकार ने कहा है कि गरीबी रेखा के नीचे (बीपीएल) के लोगों की तथा अंत्योदय अन्न योजना (एएवाई) के लाभार्थियों की जरूरतें पूरी करने बाद ही सरकार गरीबी रेखा के ऊपर (एपीएल) के लोगों को खाद्यान्न मुहैया करा रही है।

सर्वोच्च न्यायालय, पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसूएल) की ओर से दायर एक याचिका की सुनवाई कर रहा था। याचिका में बीपीएल और एएवाई श्रेणी के कार्ड धारकों को खाद्यान्न उपलब्ध कराने तथा खाद्यान्नों को सड़ने से रोकने के लिए समुचित भंडारण व्यवस्था की मांग की मांग की गई है। इसके पहले एक अदालत आयुक्त ने अपनी रिपोर्ट में अदालत को बताया कि सरकारी गोदामों में 50,000 टन गेहूं पहले ही खराब हो चुका है और वह खाने लायक नहीं रह गया है।

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