इस्लामी कट्टरपंथी दुनिया के लिए सबसे बड़ी चुनौती: टोनी ब्लेयर

‘9/11 हमले ने मेरी सोच बदल दी’
इराक और अफ़ग़ानिस्तान में आतंकवाद के ख़िलाफ़ छेड़े गए युद्ध में ब्रिटेन का नेतृत्व करने वाले ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने कहा है कि इस्लाम को मानने वाले कट्टरपंथी दुनिया की लिए सबसे बड़ी चुनौती हैं.

ब्लेयर ने कहा कि चेचन्या, कश्मीर, फ़लस्तीन, इराक और अफ़ग़ानिस्तान में फैले कट्टरपंथी मानते हैं कि अपने मुद्दों और अपनी लड़ाई के लिए कुछ भी करना जायज़ है. उन्होंने कहा कि कट्टरपंथियों को अगर मौका मिले तो इस लड़ाई को जीतने के लिए वो परमाणु, रासायनिक और जैविक युद्ध भी छेड़ सकते हैं.

बीबीसी को दिए एक साक्षात्कार में टोनी ब्लेयर ने कहा कि अमरीका पर हुए 9/11 के हमले ने विदेश निति को लेकर उनकी सोच को बदल दिया. ब्लेयर ने कहा,''हमले के बाद मैंने सोचा कि धार्मिक विचारधारा को लेकर किस तरह एक ही दिन में न्यूयॉर्क में तीन हज़ार लोगों को मार दिया गया. मेरे लिए ये मुद्दा अहम था कि अगर वो लोग तीन हज़ार कि बजाय 30 हज़ार लोगों को मार सकते तो उन्हें भी मार देते. ''

''मैंने सोचा कि हमारी सुरक्षा को लेकर पैदा हुए इस नए संकट से निपटने के लिए हमें नई तरह की विदेश नीति चाहिए.'' कट्टरपंथ की तुलना क्रांतिकारी वाम आंदोलन से करते हुए ब्लेयर ने कहा कि साम्यवादियों की तरह चरमपंथी भी अपनी विचारधारा को किसी भी कीमत पर सही ठहराते हैं और उसके लिए कुछ भी करने को तैयार हैं.

इस्लाम को मानने वाले कट्टरपंथी विश्व की सुरक्षा के लिए आज सबसे बड़ी चुनौती बन चुके हैं. इराक और अफ़ग़ानिस्तान पर किए युद्ध से इस्लामी कट्टरवाद को बढ़ावा मिलने के आरोप को खारिज करते हुए ब्लेयर ने कहा कि उन्होंने जो भी नीतियां बनाईं वो इस्लामी कट्टरवाद से लड़ने के लिए थीं. उन्होंने कहा कि पश्चिमी नीतियों का मकसद कट्टरपंथियों को खत्म करना है क्योंकि वो पिछड़ी हुई मानसिकता को लेकर चल रहे हैं.

ब्लेयर ने कहा,''सच्चाई ये है कि इराक और अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद विदेशी सेनाएं इन देशों को छोड़ देतीं अगर ये लड़ाई आतंकवाद के ख़िलाफ़ न होती.'' ''मैं नहीं मानता कि कट्टरपंथी विदेशियों को अपनी ज़मीन से खदेड़ने के लिए लड़ रहे हैं. अगर ऐसा होता तो अमरीका जब अपनी सेनाएं इराक से हटा रहा तब भी बग़दाद में कारों में धमाके क्यों हो रहे हैं. कट्टरपंथियों का मकसद उस सरकार को अस्थिर बनाना है जिसे लोगों ने ख़ुद चुना है.''

ब्लेयर ने कहा कि यह दलील सही नहीं है कि पश्चिमी देशों की नीतियां आतंकवाद को बढ़ावा दे रही हैं. पश्चिमी देश इराक और अफ़ग़ानिस्तान जैसे देशों में लोकतंत्र के समर्थक हैं और इसके लिए वो कई अरब डॉलर की मदद देने को तैयार हैं. ताकि इन देशों में रहने वाले लोग ख़ुद अपना भविष्य तय कर सकें.

ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि वो अब भी अकसर ख़ुद से ये सवाल पूछते हैं कि कट्टरपंथियों का मुकाबला किस तरह किया जाए और उन्होंने जो किया वो कितना सही था. ब्लेयर ने कहा कि इन मुद्दों पर कोई भी फ़ैसला करना बहुत मुश्किल है.

ईरान की परमाणु नीतियों का विरोध करते हुए दो टूक कहा कि ईरान को समझना होगा कि जो परमाणु हथियार वो बना रहा है उन्हें रखने का उसे कोई अधिकार नहीं और ईरान के इस कदम पर ज़रूर रोक लगाई जाएगी.

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