'मध्य पूर्व में सकारात्मक है वार्ता का दौर'

'सकारात्मक है वार्ता का दौर'
अमरीका का कहना है कि उसकी पहल पर इसराइल और फ़िलिस्तीन के बीच चल रहा वार्ता का दौर सकारात्मक रुप ले रहा है.

अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन का कहना है कि यह वार्ता मध्यपूर्व में शांति स्थापित करने के लिए इसराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू और फ़िलिस्तीनी नेता महमूद अब्बास के पास एक बेहतरीन मौके की तरह है. पिछले दो साल के दौरान दोनों देशों के बीच यह पहली सीधी बातचीत है. इसराइली प्रधानमंत्री ने कहा है कि शांति स्थापित करने के लिए दोनों पक्षों को अपने-अपने स्तर पर कुछ समझौते करने होंगे.

वहीं फ़िलिस्तीनी नेता ने समझौते के लिए गाज़ा पट्टी पर इसराइल के कब्ज़े वाले निर्माण और रुकावटों को तुरंत हटाने की बात कही है. बातचीत की शुरुआत करते हुए अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने दोनों देशों को समझौते पर पहुंचने के लिए एक साल की समय सीमा दी है.उन्होंने कहा कि वो इस समस्या का एक स्थाई हल चाहते हैं ताकि 1967 से फ़िलिस्तीन पर हुआ इसराइली कब्ज़ा खत्म हो और फ़िलिस्तीन एक स्वतंत्र राष्ट्र के तौर पर रह सके.

बातचीत के दौर की शुरुआत करते हुए हिलेरी क्लिंटन ने कहा कि अमरीका दोनों देशों का सहयोग करेगा और उसके साथ लगातार बना रहेगा. अपनी इस कोशिश के दौरान अमरीका किसी भी रुप में दोनों देशों पर कोई दबाव नहीं बनाएगा.

17 साल पहले व्हाइट हाउस में हुई इसी तरह की एक वार्ता के दौरान इसराइल और फ़िलिस्तीन के तत्कालीन नेताओं ने एक दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर किए थे जिसका मकसद दोनों देशों के बीच मतभेदों और संघर्ष को खत्म करना था. हालांकि उस कोशिश का कोई नतीजा नहीं निकला और तब से आज तक इसराइल और फ़िलिस्तीन के संघर्ष में हज़ारों लोगों की मौत हो चुकी है. जानकारों का मानना है कि समझौते की ये कोशिश भी अगर नाकाम होती है तो दोनों देशों के लिए आगे का रास्ता और भी मुश्किल होगा.

दोनों देशों के बीच लंबे समय से चल रहा सैनिक संघर्ष धीरे-धीरे धार्मिक युद्घ का रूप ले रहा है. संघर्ष के ज़रिए ख़ुदा की राह पर चलने का दावा करने वाले फ़िलिस्तीन और इसराइल के बीच किसी तरह का समझौता कराना टेढ़ी खीर है. हिलेरी क्लिंटन ने कहा, ''ये बातचीत इसराइली प्रधानमंत्री और फ़िलिस्तीनी राष्ट्रपति के रुप में अपनी दशकों पुरानी दुश्मनी को ख़त्म करने का एक बेहतरीन मौका है.''

दोनों देशों के बीच बातचीत के लिए कुछ खास मुद्दे हैं. पहला बड़ा मुद्दा है यरुशलम. दोनों ही पक्ष चाहते हैं कि वहाँ उनकी राजधानी हो. दूसरा यह कि दोनों पक्षों में इस बात पर सहमति हो जाए कि स्वतंत्र फ़िलस्तीनी राष्ट्र की सीमाएं कहाँ होंगीं.तीसरा उन फ़लस्तीनी शरणार्थियों का भविष्य क्या होगा, जो 1948 में उस हिस्से से निकल आए थे, जो इसराइल बना.

हिलेरी क्लिंटन ने कहा की ये मुद्दे तब तक नहीं सुलझेंगे जब तक दोनों देश इसके लिए कोशिशों नहीं करते. महमूद अब्बास ने कहा कि वो ये महीं जानते कि बातचीत का ये दौर कितना कठिन होगा और समझौतों के बीच कौन सी रुकावटें आ सकती हैं, क्योंकि इन समझौतों के ज़रिए हमें एक साल के अंदर किसी नतीजे पर पहुंचना है.

बातचीत के पहले दौर के बाद मीडिया को वकतव्य जारी किए गए जिसके बाद दोनों देशों के नेता मध्यपूर्वी में अमरीका के प्रतिनिधी जार्ज मिशेल के साथ अकेले में बातचीत के लिए निकल गए. मिशेल ने बताया कि दोनों नेताओं ने 14 और 15 सितंबर को मध्यपूर्व में फिर मिलने पर सहमति जताई है और इसके बाद वो बातचीत के लिए हर दूसरे हफ़्ते मिलेंगे.

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