नक्सलियों की जनअदालत में होगा अगवा पुलिसकर्मियों का फैसला
पटना। बिहार के मुंगेर-जमुई-लखीसराय जोन में पिछले दिनों पुलिस और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में 10 पुलिसकर्मी गुमशुदा हो गए थे। इनमें से 6 की लाशें उसी दिन बरामद कर ली गयीं थी जबकि 4 पुलिसकर्मियों को नक्सलियों ने बंधक बनाए जाने की बात कही थी। नक्सलियों ने स्थानीय पत्रकारों से संपर्क कर सरकार के सामने प्रस्ताव रखा था कि इन चारों पुलिसवालों कि रिहाई के बदले उन्हे देश के विविध जिलों में बंद अपने 8 साथियों की रिहाई चाहिए।
नक्सलियों ने इस शर्तो पूरा करने के लिए पहले उन्होने बुधवार शाम 4 बजे तक का समय तय किया था। जिसे उन्होने दोबारा गुरुवार सुबह 10 बजे तक बढ़ा दिया था। लेकिन सरकार ने इस मामले में अब तक अपनी ओर से कोई पहल नहीं दिखाई है। नक्सलियों ने अब दूसरी समयसीमा के खत्म होने के बाद इन पुलिसकर्मियों के भाग्य के फैसले के लिए जनअदालत लगाने की बात कही है। हालांकि राज्य में नक्सलियों से मोर्चा ले रही पुलिस और सुरक्षाकर्मियों का कहना है कि वे अपने साथियों को खोज रहे हैं और अपने स्तर पर बंधकों को मुक्त कराने का प्रयास कर रहे हैं।
प्रतिबंधित संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के कथित प्रवक्ता अविनाश ने गुरुवार को एक बार फिर स्थानीय चैनलों को फोन पर कहा कि बंधक बनाए गए लोगों के परिजनों की गुहार पर उन्होंने समय सीमा को 10 बजे तक बढ़ा दी थी परंतु अब ऐसा नहीं होगा। उसने कहा कि अब तक सरकार ने कोई पहल नहीं की है। अविनाश ने कहा कि अब जन अदालत लगाकर बंधकों के विषय में फैसला किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि अविनाश ने मंगलवार को स्थानीय चैनलों को फोन पर कहा था कि रविवार को लखीसराय जिले के कजरा थाना क्षेत्र में हमारे लोगों ने पुलिस दल पर हमला करने के बाद राज्य के दो पुलिस निरीक्षक (एसआई) और दो बिहार सैन्य बल (बीएमपी) के जवान उनके कब्जे में हैं। बंधक बनाए गए पुलिसकर्मियों में रूपेश कुमार सिन्हा (बेतिया), अभय यादव (बेगूसराय), एहतशाम खान (मांडर, रांची) तथा लुकस टेटे (सिमडेगा, झारखंड) शामिल हैं।












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