बिमान बोस की सजा रद्द
बोस को कलकत्ता उच्च न्यायालय ने एक आपराधिक अवमानना के मामले में दोषी पाया था और सजा सुनाई थी।
बोस को तीन के कारावास की सजा सुनाई गई थी और उन पर 10,000 रुपये का जुर्माना किया गया था। बोस ने बंद को प्रतिबंधित किए जाने के उच्च न्यायालय के फैसले की आलोचना की थी।
न्यायामूर्ति अमिताभ लाला ने कोलकाता में सुबह आठ बजे से शाम आठ बजे तक बंद पर प्रतिबंध लगाने संबंधी फैसला दिया था। बोस ने सार्वजनिक रूप से इस फैसले की आलोचना की थी।
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति बी.सुदर्शन रेड्डी और न्यायामूर्ति एस.एस.निज्जर ने उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ बोस की याचिका को स्वीकार कर लिया।
सर्वोच्च न्यायालय ने 26 अप्रैल, 2005 को बोस को सुनाई गई सजा पर रोक लगा दी थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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