सरकार की चेतावनी के बावजूद जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल जारी(लीड-1)
प्रदेश सरकार ने चेतावनी दी थी कि यदि जूनियर डॉक्टर 48 घंटे के अंदर काम पर नहीं लौटे तो उनका पंजीयन रद्द कर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार शाम को प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक कर जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल से उत्पन्न स्थितियों की समीक्षा की थी। समीक्षा के दौरान डॉक्टरों की हड़ताल को नाजायज करार देते हुए उन्हें 48 घंटों के भीतर काम पर न लौटने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी।
उन्होंने सभी हड़ताली डॉक्टरों को नोटिस देकर पंजीयन निरस्त करने के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री का कहना है कि डॉक्टरों की कई मांगें पहले मानी जा चुकी हैं और इस समय प्रदेश विभिन्न बीमारियों से जूझ रहा है। ऐसे में डॉक्टरों का हड़ताल पर जाना मानवीय दृष्टिकोण से उचित नहीं है।
वहीं दूसरी ओर जूडा के अध्यक्ष विक्रांत भूरिया ने बुधवार को आईएएनएस से चर्चा करते हुए कहा कि अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को भ्रम में रखा है, उनका कहना है कि डॉक्टर गांव में सेवाएं देने के लिए तैयार हैं, इसके लिए अनुबंध किया गया है। इसके बावजूद यह प्रचारित किया जा रहा है कि जूनियर डॉक्टर गांव में नहीं जाना चाहते।
भूरिया का कहना है कि उनकी मांगों पर प्रशासन चर्चा करने के लिए तैयार नहीं है। सरकार की तरफ से कोई पहल नहीं हो रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि जूनियर डॉक्टर सामूहिक रूप से इस्तीफा दे चुके हैं। इसके बावजूद जूनियर डॉक्टरों ने तय किया है कि सरकार चाहे जो निर्णय ले वे मांगें पूरी होने से पहले काम पर नहीं लौटेंगे।
प्रदेश के चार चिकित्सा महाविद्यालयों इंदौर, रीवा, ग्वालियर और जबलपुर के जूनियर डॉक्टर गत 17 अगस्त से हड़ताल पर हैं। इस हड़ताल के चलते स्वास्थ्य सेवाएं गड़बडा गई हैं।
तमाम सरकारी डॉक्टरों के साथ निजी डॉक्टरों की सेवाएं लेने के सरकार के फैसले के बावजूद मरीजों को लाभ नहीं मिल पा रहा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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