स्वास्थ्य बीमा कंपनियां अपनी रणनीति बदलेंगी
नेशनल इंश्योरेंस कंपनी (एनआईसी) के निदेशक ए. वी. गिरजा कुमार ने कहा, "हम उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति को ध्यान में रखते हुए बीमा पॉलिसियां बनाने पर जोर दे रहे हैं।"
सीआईआई द्वारा आयोजित एक सम्मेलन के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, "जिनके पास कैशलेस इलाज की पॉलिसी है उनके बिल सामान्य मरीजों से काफी ज्यादा हैं।"
इससे बीमा कंपनियों को भारी राशि चुकानी पड़ रही है। कंपनियां यह भार नहीं उठा सकतीं।
कुमार ने कहा, "यह कैशलेस सुविधा बंद करने के संबंध में नहीं है, इसका अर्थ यह है कि उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए नए उपाय किए जाएं।"
उन्होंने कहा, "अंत में हमें पॉलिसी धारकों के हितों का ध्यान रखना पड़ेगा। न ही हम और न ही अस्पताल उन्हें सेवा देने से इंकार कर सकते हैं। ऐसे में दोनों पक्षों को लागत को तर्कसंगत बनाने का प्रयास करना चाहिए।"
सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां भी बीमारी आधारित स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों पर विचार कर रही हैं।
पिछले साल नेशनल इंश्योरेंश कंपनी को स्वास्थ्य बीमा के 108 प्रतिशत दावे प्राप्त हुए थे। इसमें व्यक्तिगत और ग्रुप मेडीक्लेम शामिल हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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