आपदा राहत के लिए निशंक ने मांगे 5 हजार करोड़ रुपये
आपदा ग्रसित क्षेत्रों का दौरा कर लौटे मुख्यमंत्री ने शनिवार को संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि भारी बारिश के चलते राज्य में धन-जन की भारी क्षति हुई है। उन्होंने कहा कि इसका सीधा असर बुनियादी सुविधाओं पर पड़ा है।
निशंक ने बताया कि इस प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री से फोन पर बात की और राज्य को आर्थिक सहायता मुहैया कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने हर संभव सहयोग का वादा किया है। उन्होंने बताया कि वह जल्द ही इस मसले पर विस्तार से प्रधानमंत्री को पत्र लिखेंगे और उनके पास सहायता राशि के लिए एक विस्तृत प्रस्ताव भी भेजेंगे।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्राकृतिक आपदा के कारण राज्य में हुई क्षति के आकलन और विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है जो जल्द ही इस कार्य को पूरा करेगी। उन्होंने कहा कि वह प्रधानमंत्री से मुलाकात कर उनसे सहायता का आग्रह करेंगे।
निशंक ने बताया कि मूसलाधार बारिश और भूस्खलन के चलते अब तक 69 लोगों की मौत हो चुकी है और 173 लोग घायल हुए हैं। इन घटनाओं में लगभग साढ़े तीन हजार करोड़ रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ है, जिसमें एक हजार करोड़ की सरकारी संपत्ति नष्ट हुई है।
आपदा से निपटने की चुनौतियों को गिनाते हुए निशंक ने कहा कि प्राकृतिक आपदा के मद्देनजर भूवैज्ञानिकों ने एक सौ एक गांवों को अत्यंत संवेदनशील माना है जिसे तुरंत वहां से हटाकर अन्यत्र स्थापित किए जाने की जरूरत है। इसके लिए मुख्यमंत्री ने वन भूमि अधिनियम को रोड़ा मानते हुए कहा कि संवेदनशील गांवों को हटाकर अन्य जगह स्थापित करने के लिए वन भूमि का उपयोग जरूरी है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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