लेह में नष्ट हुए घर फिर से निर्मित किए जाएंगे : प्रधानमंत्री (राउंडअप)

अपने दिन भर के दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ने लेह कस्बे और पास के गांवों के पुनर्निर्माण के लिए 125 करोड़ रुपये के राहत पैकेज की घोषणा की। यह धनराशि प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय राहत कोष से प्रदान की जाएगी।

प्रधानमंत्री ने आपदा में मारे गए लोगों के परिजनों के लिए 100,000 रुपये और घायलों के लिए 50,000 रुपये अनुग्रह राशि की घोषणा भी की।

लेह कस्बे और आसपास के इलाकों में छह अगस्त की रात बादल फटने की घटना से भारी तबाही हुई। इसमें छह विदेशी नागरिकों सहित कम से कम 179 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 200 लोग अभी भी लापता हैं।

आपदा के शिकार हुए लोगों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके लेह दौरे का मकसद इस नाजुक घड़ी में लद्दाख के लोगों के दर्द को बांटना है।

प्रधानमंत्री ने आश्वस्त किया कि केंद्र एवं राज्य सरकारों तथा लेह पर्वतीय परिषद के सामूहिक प्रयास से सर्दी के पहले ही पुनर्वास कार्य पूरा कर लिया जाएगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अस्पतालों और सीटी स्कैन इकाइयों को बहाल किए जाने के अलावा पेयजल आपूर्ति, विद्युत एवं सड़क संपर्क को भी प्रभावी तरीके से बहाल किया जाएगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सभी पुनर्वास एवं सुविधाओं की बहाली का कार्य जम्मू एवं कश्मीर के मुख्य सचिव के नेतृत्व वाली एक निगरानी समिति की निगरानी में संपन्न होगा।

प्रधानमंत्री ने बाद में नुकसान, राहत एवं पुनर्वास उपायों पर एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की। बैठक में राज्यपाल एन.एन.वोहरा, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री गुलाम नबी आजाद, केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री फारुक अब्दुल्ला तथा राज्य एवं जिले के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

जम्मू एवं कश्मीर के योजना एवं लद्दाख मामलों के आयुक्त/सचिव, बी.बी.व्यास ने आपदा के कारण हुए नुकसान और राहत, बचाव तथा पुनर्वास उपायों के बारे में भावी रणनीति पर प्रधानमंत्री के समक्ष एक प्रस्तुति दी।

प्रधानमंत्री ने कहा, "बादल फटने के कारण अचानक हुए जान-माल के त्रासदपूर्ण नुकसान की खबर सुनकर मुझे गहरा सदमा लगा था।"

पीड़ितों के प्रति अपनी सहानुभूति जाहिर करते हुए सिंह ने कहा, "जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया है, मैं तह-ए-दिल से उन सभी के साथ हूं। मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि दुख की इस घड़ी में वह उन्हें हिम्मत प्रदान करे।"

सिंह ने कहा कि वह पहले ही लेह का दौरा करना चाहते थे, लेकिन ऐसा इसलिए नहीं कर पाए, क्योंकि राहत एवं बचाव कार्य प्रभावित होता।

प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार आपदा से प्रभावित परिवारों की मदद के लिए हर संभव कदम उठाएंगी।

सिंह ने वादा किया, "ठंड शुरू होने से पहले मैं दोबारा आप लोगों से मिलने आऊंगा और आप लोगों के लिए तैयार किए गए घरों का निरीक्षण करूंगा।"

प्रधानमंत्री ने कहा कि 125 करोड़ रुपये के राहत पैकेज के अलावा तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने के लिए लेह तथा कारगिल स्वायत्तशासी हिल विकास परिषदों को अलग-अलग पांच करोड़ रुपये के अनुदान दिए गए हैं। यह धनराशि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से विशेष पैकेज के तहत प्रदान किए जाएंगे।

प्रधानमंत्री ने लद्दाख में आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए प्रत्येक मकान के लिए 100,000 रुपये तथा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए मकान के लिए 200,000 रुपये की सहायता की भी घोषणा की।

प्रधानमंत्री ने आपदा पीड़ितों की मदद करने में जुटे सेना, वायुसेना, सीमा सड़क संगठन (बीआरओ), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) के जवानों की उनके अथक प्रयासों के लिए प्रशंसा की।

प्रधानमंत्री के साथ केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद, केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री फारूक अब्दुल्ला और राज्य कांग्रेस अध्यक्ष सैफुद्दीन सोज भी थे। कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी और रक्षा राज्य मंत्री एम.एम.पल्लम राजू ने सोमवार को इलाके का दौरा किया था।

स्वतंत्रता दिवस पर अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने कहा था कि लेह के बाढ़ पीड़ितों को राहत देने और उनके पुनर्वास के सभी प्रयास किए जाएंगे।

लोकसभा में सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्री पी.चिदंबरम ने एक बयान में कहा कि थल सेना, वायु सेना, सीमा सड़क संगठन, राष्ट्रीय आपदा राहत बल और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के करीब 6,000 जवान राहत कार्यो में नागरिक प्रशासन की मदद कर रहे हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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