अलीगढ़ और मथुरा में तनाव बरकरार (लीड-1)
कथित रूप से पूरी घटना को संभालने में पुलिस की नाकामी सामने आने पर सरकार ने रविवार देर शाम अलीगढ़ के एसएसपी विजय प्रकाश को हटाकर उनके स्थान पर सत्येंद्र वीर सिंह को अलीगढ़ का नया एसएसपी और मथुरा के एसएसपी बी.डी.पॉल्सन को हटाकर उनके स्थान पर लव कुमार को मथुरा नया एसएसपी बनाने का फैसला किया।
राज्य सरकार द्वारा की गई शांति की अपील के बावजूद सड़कों पर उतरे उग्र किसानों ने रविवार सुबह कई सरकारी वाहन और एक्सप्रेस वे के निर्माण में लगे वाहन को आग के हवाले कर दिए।
अलीगढ़ के टप्पल और सरौल इलाकों में किसानों ने यमुना एक्सप्रेस वे के निर्माण में लगे करीब पांच रोड रोलरों और आठ डंपरों में तोड़फोड़ करके उन्हें जला दिया।
उग्र किसानों ने यमुना एक्सप्रेस वे पर जे.पी. इंडस्ट्रीज के तीन गोदामों को भी आग के हवाले कर दिया। इन गोदामों में निर्माण का सामान रखा हुआ था। मथुरा में भी किसानों द्वारा कुछ डंपरों को अपना निशाना बनाया।
शनिवार रात गोलीबारी की घटना के बाद पुलिस पूरे मामले पर रक्षात्मक रुख अपना रही है। तोड़फोड़ और आगजनी कर रहे किसानों पर रविवार को पुलिस की ओर से कोई सख्त कार्रवाई देखने को नहीं मिली है।
शांति स्थापित करने के लिए प्रशासन तनावग्रस्त इलाकों में धारा 144 लगाकर प्रदर्शनकारियों से शांति की अपील कर रहा है। अलीगढ़ के जिलाधिकारी के. आर. मोहन राव ने रविवार को संवाददाताओं को बताया कि हम किसानों से अपील कर रहे हैं कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर संयम बरतें। उनकी जो भी मांगें हैं, उन्हें चर्चा के जरिये हल करें। कानून हाथ में लेकर आगजनी और गोलीबारी न करें।
राव ने कहा कि तनावपूर्ण हालात पर नियंत्रण पाने के प्रयास किये जा रहे हैं। तनावग्रस्त इलाकों में भारी संख्या में पुलिस बल के साथ-साथ प्रांतीय सशस्त्र बल(पीएससी) तैनात की गई है। स्थिति पर काबू पाने के लिए चार जिलों से पुलिसबल बुलाया गया है।
उधर किसान अपनी मांगे न माने जाने तक प्रदशर्न ऐसी ही चलते रहने की धमकी दे रहे हैं। किसानों ने कहा कि जब तक उनके गिरफ्तार नेता रामबाबू कथीरिया की रिहाई और वाजिब मुआवजा देने की बात नहीं मानी जाएगी, उनका आदोलन नहीं थमेगा।
अलीगढ़ में शनिवार देर रात किसानों और पुलिस के बीच हुए संघर्ष में एक पुलिसकर्मी सहित दो लोगों की मौत हो गई थी और करीब एक दर्जन लोग घायल हो गए थे।
हिंसा में मारे गये पुलिसकर्मी की पहचान ब्रजेंद्र सिंह के रूप में हुई है। वह प्रांतीय सशस्त्र पुलिस (पीएसी) में प्लाटून कमांडर था। जबिक पुलिस की गोली से मारे गए किसान की पहचान प्रशांत के रूप में हुई है।
किसानों का आरोप है कि पुलिस की गोलीबारी में पांच किसानों की मौत हुई है जबकि प्रशासन एक किसान की मौत का दावा कर रहा है। जिलाधिकारी ने कहा कि सिर्फ एक किसान की मौत हुई है। उन्होंने कहा कि कुछ प्रदर्शनकारियों की ओर से गोलीबारी शुरू किए जाने के बाद पुलिस को मजबूरन जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी थी।
किसान नोएडा और आगरा के बीच बनने वाले यमुना एक्सप्रेसवे के लिए अधिग्रहित की जा रही जमीन के लिए ज्यादा मुआवजे की मांग कर रहे हैं। कुल 165 किलोमीटर लंबे आठ लेन वाले इस मार्ग के निर्माण का ठेका जे. पी. इंडस्ट्रीज को दिया गया है।
हिंसा की शुरूआत किसान नेता राम बाबू कथीरिया की गिरफ्तारी के बाद हुई थी। कथीरिया अधिक मुआवजे की मांग को लेकर पिछले कुछ दिन से किसानों के विरोध प्रदशर्न का नेतृत्व कर रहे थे। बताया गया है कि कथीरिया ग्रेटर नोएडा के किसानों को दिए गए मुआवजे की दर के अनुसार ही मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
अलीगढ़ से शुरू हुई हिंसा मथुरा जिले तक फैल गई। मथुरा में भी किसानों ने कई वाहनों को आग लगा दी। विरोधी दलों ने पूरी घटना के लिए राज्य सरकार को दोषी ठहराया है। प्रमुख विपक्षी दल समाजवादी पार्टी(सपा) के प्रदेश प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा कि यह सरकार उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए किसानों को भूमिहीन बनाने पर तुली है। उन्होंने कहा कि सपा सरकार के इस कदम के खिलाफ प्रदेशभर में आंदोलन करेगी।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी ने मायावती सरकार को किसान विरोधी करार देते हुए कहा कि पूरी घटना के लिए राज्य सरकार जिम्मेदार है।
उधर मथुरा पहुंचे राष्ट्रीय लोक दल के नेता एवं मथुरा सांसद जयंत चौधरी ने कहा कि यह सरकार अत्याचारी और किसान विरोधी है। सरकार ने बाचतीत के जरिये मामला सुलझाने के प्रयास नहीं किये।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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