उमर पर जूता उछालने के मामले में 15 पुलिसकर्मी निलंबित (लीड-3)

श्रीनगर, 15 अगस्त (आईएएनएस)। स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान जम्मू एवं कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर रविवार को जूता उछाले जाने के मामले में सुरक्षा खामियों के लिए 15 पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया गया है।

स्थानीय बख्शी स्टेडियम में आयोजित समारोह में जब अब्दुल्ला हिस्सा ले रहे थे, तो एक पूर्व हेड कांस्टेबल ने अब्दुल्ला के ठीक पीछे वीआईपी दीर्घा में एक सीट हासिल कर लिया। उसने अब्दुल्ला पर भूरे रंग का जूता फेंका और आजादी समर्थक नारे लगाया। उसके बाद सुरक्षा कर्मियों ने उसे पकड़ लिया।

अब्दुल अहद जान द्वारा फेंका गया जूता अब्दुल्ला के सामने जमीन पर आ गिरा। जूते से किसी को कोई चोट नहीं लगी। इस घटना से बेफिक्र उमर ने कहा कि पत्थर फेंकने की तुलना में जूता फेंकना कहीं अच्छा है।

जानकारी के मुताबिक जूता उछालने वाला व्यक्ति जम्मू एवं कश्मीर पुलिस का निलंबित सहायक उप निरीक्षक है।

जान ने मुख्यमंत्री को कथित तौर पर काला झंडा भी दिखाया।

एक पुलिस अधिकारी ने कहा, "अब्दुल अहद जान दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में निलंबित हेड कांस्टेबल है। उस पर पहले ही एक आपराधिक मामला चल रहा है।"

पुलिस ने कहा कि जान पर सरकार से फर्जी तरीके से मुआवजा लेने का मामला भी चल रहा है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि निलंबित कर्मचारी को उच्च सुरक्षा क्षेत्र में प्रवेश कैसे दिया गया।

कश्मीर में पिछले कई दिनों से हो रही पत्थरबाजी को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने इस घटना के बारे में कहा, "विरोध करने का यह ज्यादा सही तरीका है। शुक्र है कि उसने पत्थर नहीं फेंका, बल्कि जूता फेंका। जूते से कम से कम कोई घायल नहीं हुआ।"

इस घटना के बावजूद समारोह का आयोजन चलता रहा। अब्दुल्ला ने अपने संबोधन में कहा, "11 जून के बाद हुई विरोध प्रदर्शन की घटनाओं में मारे गए लोगों के प्रति मैं संवेदना प्रकट करता हूं। मैं पीड़ित परिवारों के साथ हूं। कोई इतना पत्थर दिल नहीं हो सकता कि लोगों की मौत पर उसकी आंखों से आंसू न टपके ।"

उन्होंने कहा कि कोई भी आर्थिक मदद या सहायता इन मौतों की भरपाई नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता के हित में राज्य का आर्थिक विकास बहुत जरूरी है।

उन्होंने घोषणा की कि अगले कुछ महीनों के भीतर राज्य में 50,000 युवाओं को सरकारी नौकरियां दी जाएंगी। इस मौके पर अब्दुल्ला ने अलगाववादी नेताओं से वार्ता की अपील की और कहा कि जम्मू एवं कश्मीर की समस्या के समाधान में वे अपनी भूमिका का निर्वाह करें।

उल्लेखनीय है कि घाटी में अलगाववादियों ने 15 अगस्त को काला दिवस के रूप में मनाने का आह्वान किया था। इसके मद्देनजर पूरी घाटी में बंद रहा और इससे जनजीवन प्रभावित हुआ।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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