संस्थाओं में नैतिकता को पुनस्र्थापित करना होगा : कपाड़िया
कपाड़िया ने कहा, "हम भ्रष्टाचार की चुनौती का सामना कर रहे हैं। चाहे वह सर्वोच्च न्यायालय हो, उच्च न्यायालय हो या कोई भी संवैधानिक संस्था सभी जगह संस्थागत नैतिकता को पुनस्र्थापित करने की जरूरत है। "
देश के 64 वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सर्वोच्च न्यायालय बार एसोसिएशन (एससीबीए) में आयोजित समारोह के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि समेकित विकास के तमाम विचारों के बावजूद अमीर और गरीब के बीच भारी असमानता बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि यह बड़ा विरोधाभास है कि एक ओर जहां भारत सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक है वहीं दूसरी ओर यहां टीवी और शुगर से पीड़ित लोगों की संख्या सबसे ज्यादा है। मानव विकास सूचकांक में भारत 134 वें स्थान पर है। दुनिया के 40 करोड़ सबसे ज्यादा गरीब लोग भारत में रहते हैं।
कपाड़िया ने कहा कि सार्वभौमिक दया से पूर्ण और समतावादी व्यवस्था का निर्माण आवश्यक है। उन्होंने कहा, "मेरा स्वप्न मौजूदा व्यवस्था के अंतर्गत इन लक्ष्यों को प्राप्त करना है।"
एससीबीए के अध्यक्ष राम जेठमलानी ने समारोह में कहा कि राष्ट्रीय ध्वज आंतरिक स्वतंत्रता और बाहरी संप्रभुता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस का समारोह रूढ़िवादी नहीं होना चाहिए स्वतंत्रता की खुशी को लोगों के चेहरों में तलाशा जाना चाहिए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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