एक शख्स के पास 65 वर्षो के अखबारों का संग्रह
आजाद मानते हैं कि स्वतंत्रता आंदोलन के समय के अखबारों के संग्रह ने उन्हें यह जज्बा दिया और अब तो इसकी आदत पड़ गई है। स्थानीय लोगों में नेता जी के नाम से प्रचलित आजाद बताते हैं कि उनके पिता स्व़ महाराज सिंह अखबार के बहुत बड़े प्रेमी थे और वह भी अखबार का संग्रह करते थे। उनके ही इस काम को वह भी आगे बढ़ा रहे हैं। उनके पास वर्ष 1942 के अखबारों की कई प्रतियां मौजूद हैं जब उनकी उम्र मात्र छह वर्ष थी।
आजाद कहते हैं कि आज भी स्वाधीनता की लड़ाई के समय के अखबार को वह पढ़ते हैं। यही नहीं नेता जी को कई समाचारों के शीर्षक याद हो गए हैं। आजादी मिलने की तिथि 15 अगस्त 1947 को छपे कई अखबारों के समाचार के शीर्षक उन्हें कंठस्थ हैं। वह कहते हैं कि महात्मा गांधी की हत्या के बाद तत्कालीन समय में सबसे लोकप्रिय अखबार 'आर्यावर्त ' जिसका प्रकाशन अब बंद हो चुका है, में हत्या से संबंधित समाचार का शीषर्क छपा था ' युग पुरूष गांधी की निर्मम हत्या' तो नव भारत टाइम्स ने इस समाचार को 'सारा भारत अंधेरे में डूबा' शीर्षक के साथ प्रकाशित किया था। उनके पास कई ऐसे अखबारों का संग्रह है जिसका प्रकाशन ही बंद हो चुका है।
समाज को कुछ देने की लालसा के कारण उन्होंने अपनी सरकारी नौकरी को छोड़ इस काम में तन मन से लगे हुए हैं। अब उन्हें इस अमूल्य धरोहर को सहेजने की चिंता सता रही है। उन्होंने अपने ही घर में हालांकि 'श्री दुर्गा पुस्तकालय ' के नाम से एक पुस्तकालय खोल दिया है तथा इसके संचालन के लिए एक समिति बना दी है। परंतु वह कहते हैं कि पुस्तकालय की देखभाल करने वाला भी कोई नहीं दिखता।
इधर, मुजफ्फरपुर के बुद्घजीवी नेता जी के इस कार्य को काफी पसंद करते हैं। मुजफ्फर पुर के जाने माने साहित्यकार संजय पंकज कहते हैं कि नेताजी का यह कार्य बेमिसाल है। आज लोग पुस्तक नहीं सहेज पाते और उन्होंने तो अखबारों को ही सहेज रखा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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