पैरासिटामॉल से किशोरों में दमा का खतरा (लीड-1)
शोध में कहा गया कि साल में कम से कम एक बार पैरासिटामॉल लेने वाले किशोरों में दमा का खतरा यह दवा नहीं लेने वाले किशोरों की तुलना में 50 प्रतिशत ज्यादा होता है।
डेली मेल समाचार पत्र में प्रकाशित अध्ययन के निष्कर्षो के मुताबिक कुल 50 देशों के तीन लाख किशोरों पर किए गए इस अध्ययन में पाया गया है कि पैरासिटामॉल दवा लेने वाले किशोरों में नाक में खुजली और एलर्जी की स्थितियां पाई गईं हैं।
वैज्ञानिकों ने कहा कि पैरासिटामॉल से बच्चों में शारीरिक बदलाव के कारण सूजन और एलर्जी का खतरा बढ़ जाता है।
अध्ययन में दर्दनाशक और दमा में सीधा संबंध स्थापित किया गया है। इससे पहले के शोधों में इस दवा से वयस्कों और बच्चों में बीमारियां बढ़ने का खतरा जताया जा चुका है।
एक प्रतिष्ठित अमेरिकी जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में कहा गया कि पैरासिटामॉल दमा का कारण नहीं है लेकिन इसका दमा से संबंध है।
इस दवा के ज्यादा उपयोग से दमा के विकास की स्थितियां पैदा हो सकती हैं।
इस अध्ययन का नेतृत्व करने वाले न्यूजीलैंड के चिकित्सा अनुसंधान संस्थान के चिकित्सक रिचर्ड बीसली ने अध्ययन के दौरान 13 से 14 वर्ष की उम्र के सभी तीन लाख किशोरों के साक्षात्कार की वीडियो रिकार्डिग की है।
अध्ययन में एक महीने में इस दवा का ज्यादा उपयोग करने वाले, एक साल में कम से कम एक बार उपयोग करने वाले और इस दवा का उपयोग न करने वाले किशोरों की स्वास्थ्य जांच के निष्कर्षो का अध्ययन किया गया है।
जिन किशोरों ने एक महीने की अवधि में इस दवा का उपयोग किया था उनमें दमा का खतरा दूसरों से ज्यादा पाया गया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications