अमेरिकी सीनेटर ने भारतीय आईटी कंपनियों को 'मिस्त्री की दुकान' बताया

वाशिंगटन, 14 अगस्त (आईएएनएस)। वीजा शुल्क वृद्धि के लिए बने विवादास्पद कानून के मुख्य प्रेरक अमेरिकी सीनेटर चार्ल्स शूमर ने इन्फोसिस जैसी भारतीय आईटी कम्पनियों को 'कबाड़ी की दुकान' बताने वाली अपनी टिप्पणी में संशोधन करते हुए उनको 'मिस्त्री की दुकान' कहा है।

शूमर ने कहा कि उनका मतलब 'मिस्त्री की दुकान' से था जहां सस्ते श्रमिकों का शोषण किया जाता है न कि चुराई गई कारों के पुर्जे अलग करने वाली 'कबाड़ी की दुकान'। उन्होंने कहा कि उनका विचार केवल भारतीय कम्पनियों नहीं वरन बेंगलुरू, बीजिंग और बोस्टन की ऐसी सभी कंपनियों को निशाना बना था।

न्यूयार्क से डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेटर ने कहा, "अपनी पहले की गई टिप्पणी के बारे में स्पष्ट करना चाहता हूं जिसमें गलत ढंग से कहा गया कि मैंने इन कंपनियों को कबाड़ी की दुकान बताया था।"

शूमर ने सीनेट में कहा, "वह बयान सही नहीं था और मैं इसे स्वीकार करता हूं। आईटी उद्योग में ऐसी कपंनियां मिस्त्री की दुकान के तौर पर जानी जाती हैं। मैं यही कहना चाहता हूं और वे यही हैं।"

उन्होंने कहा, " जिस तरह से ये कंपनियां एच-1बी वीजा का उपयोग करती हैं, मैं उसके पूरी तरह खिलाफ हूं। कांग्रेस का ऐसा कभी इरादा नहीं था। यदि मेरे बयान से कोई इन कंपनियों के अवैध कार्यो में लगे होने का निष्कर्ष निकालता है तो यह दुर्भाग्यपूर्ण होगा।"

शूमर ने कहा, "मैं यह भी स्पष्ट करना चाहूंगा कि वीजा शुल्क में वृद्धि का उद्देश्य किसी देश के व्यापार को प्रभावित करना है।"

कई अखबारों में यह कहा गया कि इससे केवल भारत स्थित कंपनियां ही प्रभावित होंगी और इस कानून का उद्देश्य भारतीय आईटी कंपनियों को निशाना बनाना है। शूमर ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा, "यह सही नहीं है। हमने केवल एच-1बी वीजा की शुल्क राशि बढ़ाई है और किसी भी देश की कोई भी कंपनी इसका उपयोग कर सकती है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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