इशरत जहां मुठभेड़ मामले की जांच एसआईटी के जिम्मे

अहमदाबाद। इशरत जहां संदिग्ध मुठभेड़ मामले में गुजरात हाई कोर्ट ने मामले की जांच गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त विशेष जांच दल (एसआईटी) को सौंप दी। ऐसा लगता है फर्जी मुठभेड़ मामलों में नरेन्द्र मोदी और गुजरात पुलिस पर कानून का शिकंजा कसता ही जा रहा है।

मुठभेड़ों का सिलसिला

मुंबई की छात्रा 19 वर्षीय इशरत जहां और उसके तीन साथियों को गुजरात पुलिस ने 15 जून 2004 को अहमदाबाद के पास एक मुठभेड़ में मार दिया था। गुजरात पुलिस का दावा था कि इशरत और उसके साथी आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैय्यबा से जुड़े़ थे और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की साजिश रच रहे थे।

इसके एक साल बाद 2005 में सोहराबुद्दीन को भी लशकर का आतंकी बताकर गुजरात पुलिस ने एक मुठभेड़ में मार गिराया था। इस मामले में गुजरात के पूर्व गृह राज्य मंत्री अमित शाह जेल में हैं।

लशकर से संबंध

इशरत और उसके साथियों के मुठभेड़ में मारे जाने के बाद लश्कर ने लाहौर से प्रकाशित अपने मुखपत्र 'गजवा टाइम्स' में लिखा था कि इशरत लश्कर की सदस्य थी। हालांकि बाद में लश्कर के ऊपजे नए संगठन जमात-उद-दावा ने इससे इंकार करते हुए, इशरत के परिवार वालों से माफी भी मांगी थी।

इसी साल 5 जुलाई को पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी आतंकवादी डेविड हेडली ने स्वीकार किया कि इशरत आतंकी लश्कर-ए-तैय्यबा से जुड़ी थी। इशरत की मां ने गुजरात हाईकोर्ट में इस मामले को सीबीआई को सौंपने की मांग की थी लेकिन अदालत ने गुरुवार को इसे खारिज करते हुए एसआईटी को सौंप दिया।

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