कश्मीर में हिंसा, भीड़ में आतंकवादी शामिल
चिदंबरम ने जम्मू एवं कश्मीर के हालात पर लोकसभा में दिए एक बयान में कहा, "इस बात के कई उदाहरण सामने आए हैं, जब भीड़ ने सुरक्षा बलों पर गोलीबारी की है। इस बात की खुफिया जानकारी है कि कुछ हथियारबंद आतंकी भीड़ के साथ घुल-मिल गए हैं और उन्होंने ही सुरक्षा बलों पर गोलीबारी की है।"
चिदंबरम ने कहा कि राजनीतिक प्रक्रिया शुरू करने की संभावना तभी तलाशी जा सकती है, जब शांति बहाल हो जाएगी। उन्होंने कहा, "हम मानते हैं कि जम्मू एवं कश्मीर से संबंधित मुद्दे हमारी जनता से संबंधित मुद्दे हैं और उन सभी को राजनीतिक प्रक्रिया और जम्मू एवं कश्मीर के लोगों के साथ संवाद स्थापित कर सुलझाया जा सकता है।"
अपील
चिदंबरम ने कश्मीरी नवयुवकों के परिवार वालों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों को हिंसक गतिविधियों में हिस्सा न लेने दें। चिदंबरम ने कहा, "आपके बच्चों की सुरक्षा और बेहतरी हमारी पहली प्राथमिकता है, आपकी भी यह पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। इसलिए मैं आप सभी से आग्रह करता हूं कि बच्चे किसी हिंसक गतिविधि में हिस्सा न लें।"
चिदंबरम ने कहा कि जून और जुलाई 2010 में पथराव की 872 घटनाएं घटीं और उस दौरान 1,456 सुरक्षा कर्मी घायल हुए। चिदंबरम ने कहा कि सुरक्षा बलों ने हिंसक प्रदर्शनों के साथ निपटने में बड़े धर्य का परिचय दिया है। उन्होंने कहा, "यह बताना मेरा कर्तव्य है कि सुरक्षा बलों ने अति गंभीर हालात में भी अति संयम बरता है। उन्होंने साहस और धैर्य का परिचय दिया है।"
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चिदंबरम ने कहा कि केंद्र सरकार मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के साथ है। कश्मीर घाटी पिछले 54 दिनों से सुरक्षा बलों की गोलीबारी में नागरिकों की हो रही मौत के खिलाफ हिंसक प्रदर्शनों के कारण उबल रही है। पिछले 11 जून से जारी हिंसा में 46 लोग मारे जा चुके हैं और 180 लोग घायल हो चुके हैं।













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