अफगानिस्तान में भारतीय दूतावास बंद कराना चाहते हैं कयानी
टोरंटो, 2 अगस्त (आईएएनएस)। कनाडा के पूर्व राजनयिक और काबुल में संयुक्त राष्ट्र मिशन के पूर्व उप प्रमुख का कहना है कि भारत को अफगानिस्तान से दूर रखने के लिए पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष जनरल अशफाक परवेज कयानी ने परदे के पीछे से बड़े पैमाने पर गुरिल्ला युद्ध छेड़ रखा है।
काबुल में वर्ष 2003 से 2005 तक कनाडा के राजदूत और बाद में वर्ष 2009 तक संयुक्त राष्ट्र मिशन के उप प्रमुख रहे क्रिस एलेक्जेंडर ने कहा कि जनरल कयानी ने अफगानिस्तान में हमले बढ़ाने को कहा है और वहां के शहरों में आत्मघाती हमलों के लिए आधार तैयार किया है।
पाकिस्तानी जनरल ने अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई से यहां तक कहा कि वह अफगानिस्तान में भारतीय वाणिज्य दूतावासों के बंद होने पर ही वह तालिबान के साथ एक शांति समझौते की मध्यस्थता कर सकते हैं।
'ग्लोब एंड मेल' में लिखे एक लेख में एलेक्जेंडर ने कहा, "जनरल कयानी के अधीन पाकिस्तानी सेना अफगानों के सहारे एक बड़े गुरिल्ला युद्ध को प्रोत्साहन दे रही है। जो बलूचिस्तान और वजीरिस्तान में फल-फूल रहा है। अफगानिस्तान में उनका अभियान पख्तून राष्ट्रवाद को दबाए रखना, भारत को बाहर करना और करजई को कमजोर करना है।"
कनाडा के राजनयिक ने कहा कि अफगानिस्तान के भीतर हिंसा फैलाने वाले अब नहीं रहे, भले ही वे पहले वहां थे। वहां संघर्ष भड़काने का अब प्रमुख साधन आईएसआई है। जनरल कयानी और अन्य इस अपराध में भागीदारी से इंकार करेंगे। परंतु विकिलीक्स के खुलासे से साफ है कि इसमें हर स्तर पर उनका हाथ है।
उन्होंने कहा कि इसी कारण पाकिस्तान में मौजूद अफगान तालिबानियों और उनके सहयोगियों के साथ सुलह नहीं हो पाई है और वे स्पष्ट तौर पर लड़ना पसंद कर रहे हैं। पाकिस्तानी सेना के समर्थन के बगैर इस्लामी कट्टरपंथियों का संघर्ष ताश के महल की तरह ढह गया होता।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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