विकीलीक्स जाँच में एफ़बीआई से मदद मांगी गई

रॉबर्ट गेट्स ने कहा कि ये अमरीकी और गठबंधन सैनिकों के लिए काफ़ी ख़तरनाक है और इसकी गहरी जाँच से ही ये पता चल पाएगा कि कैसे ये गोपनीय दस्तावेज़ लीक हुए. विकीलीक्स वेबसाइट पर ये दस्तावेज़ प्रकाशित हुए थे. वेबसाइट का कहना है कि ये दस्तावेज़ वर्ष 2004 से 2009 के बीच कई अमरीकी इकाइयों ने तैयार किए थे.
गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत में रॉबर्ट गेट्स ने कहा, "इन दस्तावेज़ों के लीक होने का सबसे ज़्यादा नुक़सान युद्धक्षेत्र में है. ये हमारे सैनिकों, हमारे गठबंधन और अफ़ग़ानिस्तान में हमारे सहयोगियों के लिए काफ़ी ख़तरनाक है. इससे हमारे रिश्तों और हमारी छवि को नुक़सान पहुँच सकता है."
उन्होंने कहा कि ख़ुफ़िया सूत्रों, तरीक़ों और सैन्य रणनीति की जानकारी दुश्मनों को मिल सकती है. रॉबर्ट गेट्स ने बताया कि उन्होंने एफ़बीआई के निदेशक रॉबर्ट मुलर से मुलाक़ात की और जाँच में उनका सहयोग मांगा. अमरीकी रक्षा मंत्री ने कहा, "यह महत्वपूर्ण है कि जाँच और राष्ट्रीय सुरक्षा में सेंध का आकलन करने के लिए हमारे पास सभी संसाधन हों"
विकीलीक्स का कहना है कि उसने यह सुनिश्चित करने की भरपूर कोशिश की थी कि इन दस्तावेज़ों के जारी होने से किसी निर्दोष का नुक़सान न हो. वेबसाइट ने क़रीब 15 हज़ार रिपोर्ट्स को रोक रखा था.
इसी लीक हुई रिपोर्टों में से एक में यह दावा किया गया है कि पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई के सदस्यों ने अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान की मदद की. इन आरोपों का पाकिस्तान ज़ोरदार खंडन करता रहा है.












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