बिहार में सूखे खेत, हताश हुए किसान
मौसम विभाग के अनुसार कोसी प्रमंडल के जिलों की बात छोड़ दी जाए तो राज्य के सभी जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है। अरवल जिला में अब तक 84़ 4 मिलीमीटर बारिश हुई है जो सामान्य से 73 प्रतिशत कम है। इसी तरह अब तक भभुआ में सामान्य से 52 प्रतिशत नालंदा में 44 प्रतिशत, पटना में 36 प्रतिशत, भागलपुर में 47 प्रतिशत बारिश कम हुई है। राज्य में अब तक सबसे ज्यादा बारिश किशनगंज में 1354़ 3 मिलीमीटर हुई जो सामान्य से 53 प्रतिशत अधिक है।
इधर, मौसम विभाग के मुताबिक सावन महीने के आगमन के बाद भी भारी बारिश के लक्षण नहीं दिखाई दे रहे हैं।
अधिकारिक सूत्रों के अनुसार सरकार राज्य के 38 जिलों में से 31 जिलों को सूखाग्रस्त घोषित करने का मन बना चुकी है। इस वर्ष के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए सरकार इस मामले में काई कोताही बरतने के मूड में नहीं है।
आपदा प्रबंधन विभाग के एक आला अधिकारी भी मानते हैं कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष स्थिति ज्यादा भयावह है। वह कहते हैं कि पांच जिलों को छोड़ दिया जाए तो कहीं भी 40 प्रतिशत से ज्यादा बारिश नहीं हुई है।
उन्होंने बताया कि अब तक 50 प्रतिशत से कम धान की रोपाई की सूचना आई है। अगर अगस्त के प्रथम सप्ताह तक भारी बारिश नहीं हुई तब स्थिति और गंभीर हो जाएगी।
इधर, किसान भी सूखे को देखकर हताश हैं। बक्सर जिले के एक किसान रामचंद्र सिंह बताते हैं कि अब तक धान की रोपाई की कौन कहे, धान के बिचड़े (पौध) को बचाने में ही किसान जुटे हैं। उपज की बात छोड़ दीजिए इस वर्ष अगले वर्ष के लिए बिचड़े ही हो जाए वही किसानों के लिए बड़ी बात होगी।
सूत्रों के अनुसार राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य के 31 जिलों को सूखाग्रस्त घोषित किए जाने की संभावना है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुधवार को वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ बैठक कर राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में की जा रही धान की रोपाई और वर्षा का जिलावार आंकड़ा उपलब्ध करने का निर्देश दिया है तथा सुखे की स्थिति से निपटने के लिए कार्ययोजना तैयार करने का आदेश दिया है। सरकार ने पिछले वर्ष राज्य के 26 जिलों को सूखाग्रस्त घोषित किया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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