आया सावन झूम के.....

सावन मास के आरंभ होते ही व्रत-उपवासों का दौर शुरू हो जाता है। सावन मास में जहाँ शिवोपासना, शिवलिंगों की पूजा की जाती है जिससे मनुष्य को अपार धन-वैभव की प्राप्ति होती है। इस माह में बिल्व पत्र, जल, अक्षत और बम-बम बोले का जयकारा लगाकर और शिव चालीसा, शिव आरती, शिव-पार्वती की उपासना से भी आप शिव को प्रसन्न कर सकते हैं। सावन मास के दौरान एक महीने तक आप भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना कर साल भर की पूजा का फल प्राप्त सकते हैं।
ॐ नम: शिवाय की गूंज
इस बार का सावन बेहद खास है। धर्म पंडितों के अनुसार इस बार सावन जिस नक्षत्र में लगा है वो नक्षत्र बेहद शुभ है। आज से 27 साल पहले ऐसा नक्षत्र देखा गया था। इस सावन की विशेषता ये भी है कि 27साल बाद इस बार का सावन सोमवार से प्रारंभ हुआ है। सावन के बारे में लोग कहते है कि भगवान शिव को ये महीना इसलिए भी बेहद पसंद क्योंकि ये ही वो माह है जिसमें शिव-पार्वती की शादी की तय हुई थी। इन दिनों की गई पूजा का फल हर मनुष्य को अवश्य ही प्राप्त होता है।
भगवान शिव अपने सभी भक्तों की मनोकामना को पूर्ण करते हैं और उनके सारे दुखों का निवारण कर उन्हें सुखी जीवन जीने का वरदान देते हैं। ॐ नम: शिवाय का मंत्र जप हमारे पाप को दूर करके हमें पुण्य के रास्ते पर ले जाते हैं।

सावन का महीना केवल पूजा -पाठ ही नहीं बल्कि हंसी -ठिठौली और रिमझिम फुहारों का भी है। इस महीनें में लोग बारिश और कजरी का मजा लेते है। तभी तो सावन का जिक्र हमारे साहित्य और फिल्मो में बेहद रोमांटिक महीने के रूप में होता है। लड़कियां इस महीने में सोलह श्रृंगार करके अपने प्रियतम को लुभाती है, ये ही वो महीना है जब नई-नवेली दुल्हन अपने ससुराल से मायके आती है। इसी महीने मे औरतें मेंहदी पीसकर अपनी हथेलियों में लगाती है और झूला झूलती है, और कजरी गाकर आनंदित होती है। बारीश की मीठी बूंदों ने सावन का खूबसूरत आगाज कर दिया है।
सोलह श्रृंगार का सावन
शिवालयों में घंटो की गूंज सुनाई दे रही है तो देर किस बात की है आप भी अपने आप को अपनों के लिए सजाइये और मनमोहक सावन का आनंद उठाइये। और गुनगुनाइये ये पंक्तिया
खिल-खिल हथेलियों पर, मेहँदी खिलखिलाए रे
अपनी सुंदरता पर, प्रीत चदरिया बिछाए रे,
कुहक रही सखियॉ सब, कोयलिया की तान सी
हिय में नया जोश भरा, छलक-छलक जाए रे....












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