बांग्लादेशी संविधान में बरकरार रहेगा 'बिस्मिल्ला..'
ढाका, 23 जुलाई (आईएएनएस)। बांग्लादेश के संविधान में 'ऐतिहासिक बदलावों' तैयारी कर रही प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा है कि संविधान में भविष्य में भी तीन शब्द 'बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम' बरकरार रहेंगे।
हसीना सरकार देश के संविधान में संशोधन की तैयारी में है ताकि संविधान को धर्मनिरपेक्ष चरित्र देने के साथ ही भविष्य में सत्ता हथियाने की सेना की किसी भी कोशिश को रोका जा सके। हसीना की ओर से गुरुवार को संसद में दिए गए इस बयान पर राजनीति पर्यवेक्षक कहते हैं कि सरकार के इस रुख से संविधान 'धर्मनिरपेक्षता' का स्वरूप नहीं ले पाएगा।
उल्लेखनीय है कि 'बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम' की दुनिया भर के मुसलमानों के लिए खासी अहमियत है। वे हर धार्मिक और शुभ काम करने से पहले इन तीनों शब्दों को बोलते हैं।
स्थानीय समाचार पत्र 'द डेली स्टार' के अनुसार हसीना ने कहा कि संविधान में परिवर्तन किया जाएगा लेकिन धर्म आधारित सियासत करने करने वाली पार्टियों मसलन बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी पर पाबंदी लगाने का उनका कोई इरादा नहीं है।
इससे पहले बांग्लादेश की संसद में बुधवार को 15 सदस्यीय एक समिति के गठन को मंजूरी मिल गई। यह समिति संविधान की समीक्षा करेगी। विपक्षी दलों ने सरकार के इस प्रयास का विरोध करते हुए संसद की कार्यवाही का बष्किार किया था।
वर्ष 1975 में हसीना के पिता और बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर्रहमान की हत्या के बाद सैन्य शासन आया था। 15 महीने के सैन्य शासन के दौरान संविधान में कई संशोधन और राजनीतिक स्तर भी बदलाव किए गए। उस दौरान बांग्लादेश तख्तापलट और फौजी शासन का गवाह बना था।
इसी दौरान बांग्लादेशी संविधान में बदलावों से राज्य का मौलिक सिद्धात बदल गया। इससे संविधान का धर्मनिरपेक्ष चरित्र खत्म हो गया और धर्म पर आधारित राजनीति होने लगी।
गौरतलब है कि संसदीय समिति के गठन में मुख्य विपक्षी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की राय नहीं ली गई। इस पर बीएनपी को आपत्ति है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications