नेपाल में 'तमाशा' बना प्रधानमंत्री का चुनाव
सुदेशना सरकार
काठमांडू, 23 जुलाई (आईएएनएस)। नेपाल में नए प्रधानमंत्री का चुनाव 'तमाशा' बनकर रह गया है। अब यह देश के दो सबसे बड़े राजनीतिक दलों के बीच सिमट गया है। शुक्रवार को यहां दोबारा चुनाव होने वाले हैं जिसके असफल होने की पूरी संभावना बनी हुई है।
दो साल पहले भारी बहुमत से विजयी होने वाले माओवादी पार्टी के अध्यक्ष पुष्प कमल दहाल 'प्रचंड' बुधवार को हुए चुनाव में साधारण बहुमत भी हासिल नहीं कर सके। अब वह पूर्व उप-प्रधानमंत्री नेपाली कांग्रेस (एनसी) के रामचंद्र पौडेल के सामने बाधाएं खड़ी कर रहे हैं।
दोनों प्रत्याशी हालांकि संसद की कुल 601 सीटों में दो तिहाई बहुमत हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन शुक्रवार को किसी की सफलता की उम्मीद नहीं है क्योंकि बाकी दो सबसे बड़े समूहों ने मतदान से बहिष्कार की धमकी दी है। इन समूहों ने पिछली बार भी ऐसा ही किया था।
बुधवार को प्रधानमंत्री पद के लिए हुए मतदान में दोनों उम्मीदवार- माओवादी पार्टी के अध्यक्ष पुष्प कमल दहाल 'प्रचंड' और नेपाली कांग्रेस (एनसी) के रामचंद्र पौडेल आवश्यक बहुमत हासिल करने में विफल रहे थे।
नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी-एकीकृत मार्क्सवादी लेनिनवादी (यूएमएल) ने दोबारा मतदान की पूर्व संध्या पर चेतावनी दी थी कि वे दोनों उम्मीदवारों में से किसी का भी समर्थन नहीं करेंगे।
यूएमएल के प्रमुख और पूर्व उम्मीदवार झालानाथ खनाल ने प्रचंड और पौडेल दोनों से आग्रह किया है कि वे अपना नामांकन वापस ले लें ताकि ताजा बातचीत शुरू हो सके।
यूएमएल तीसरा सबसे राजनीतिक दल है जिसके 109 सांसद हैं। इनकी अनुपस्थिति की स्थिति में दोनों प्रत्याशियों में से किसी को भी आवश्यक दो तिहाई बहुमत प्राप्त होने के आसार नहीं हैं।
संसद की 25 में से आधी पार्टियों ने बुधवार को दोनों उम्मीदवारों पर राष्ट्रीय हित की कीमत पर सत्ता हासिल करने का प्रयास करने का आरोप लगाया और वे मतदान से अनुपस्थित रहीं।
प्रचंड और पौडेल के 601 सदस्यीय संसद में आधे वोट हासिल करने में विफलता के बाद संसदीय सचिवालय ने कहा कि चुनाव बहिष्कार में शामिल पार्टियों का समर्थन हासिल करके किसी उम्मीदवार के साधारण बहुमत पाने में कामयाब होने तक चुनाव की प्रक्रिया जारी रहेगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications