मप्र में सवा लाख से ज्यादा बच्चे स्कूल से दूर
भोपाल, 23 जुलाई (आईएएनएस) । मध्य प्रदेश सरकार की हर बच्चे को स्कूल तक ले जाने की कोशिशें कारगर रूप नहीं ले पा रही हैं, यह खुलासा 'स्कूल चलें हम' अभियान के तहत चलाए गए एक सर्वेक्षण अभियान से हुआ है। इस सर्वेक्षण के दौरान 1,32,524 ऐसे बच्चे मिले जो स्कूल नहीं जाते।
कांग्रेस विधायक महेंद्र सिंह कालूखेड़ा द्वारा विधानसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब मे स्कूली शिक्षा मंत्री अर्चना चिटनिस ने बताया है कि जुलाई में 'स्कूल चलें हम' अभियान के तहत घर-घर संपर्क कर शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत सभी बच्चों को स्कूल तक लाने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने बताया कि इस दौरान एक लाख 32 हजार 524 ऐसे बच्चों का पता चला है जो स्कूल से दूर हैं। इनमें 11 से 14 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की संख्या 36575 है।
चिटनिस द्वारा प्रस्तुत किए गए ब्यौरे से एक बात जाहिर है कि स्कूल न जाने वाले बच्चों की सबसे ज्यादा संख्या जनजातीय बहुल जिलों में है। बड़वानी में 18632, अलीराजपुर में 17051, झाबुआ में 13376 और खरगोन में 13625 ऐसे बच्चे मिले हैं जो स्कूल नहीं जाते हैं। साथ महानगर जबलपुर में 4543 और इंदौर में 2742 बच्चे स्कूल नहीं जाते।
प्रदेश सरकार द्वारा बच्चों को स्कूल लाने के लिए चल रहे प्रयासों का हवाला देते हुए चिटनिस ने बताया कि निशुल्क पुस्तकें व बालिकाओं को वर्दी प्रदान की जा रही है। इतना ही नहीं बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम को लागू करने के लिए छह से 14 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को निशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए सभी सरकारी स्कूलों को किसी भी तरह का शुल्क न लेने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रदेश सरकार की समस्याओं का जिक्र करते हुए स्कूली शिक्षा मंत्री ने कहा कि छात्र अनुपात में 80 हजार शिक्षकों की जरूरत है, इसके लिए भारत सरकार के अधिकृत प्राधिकरण द्वारा शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता का निर्धारण करना है। योग्यता के निर्धारण के बाद ही शिक्षकों की भर्ती हो सकेगी।
उन्होंने बताया कि प्रदेश को शिक्षा का अधिकार अधिनियम को लागू करने के लिए तीन वर्ष में 10260 करोड़ रुपये की जरूरत होगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications