सर्वोच्च न्यायालय ने उपचुनाव के नियमों की जानकारी मांगी
न्यायालय ने केंद्र सरकार और तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) को इस विषय में जवाब देने के लिए कहा है कि यदि पिछले चुनाव के परिणाम पर याचिका लंबित है तब खाली सीट पर छह महीने में चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग बाध्य है या नहीं।
कुछ सीटों पर चुनाव परिणामों को लेकर चल रहे मुकदमों के चलते चुनाव आयोग को एक ही सीट पर दो प्रत्याशी चुन लिए जाने का डर है क्योंकि उप चुनाव होने पर एक प्रत्याशी की जीत होगी और पहले के चुनाव परिणाम पर मुकदमे का फैसला होने पर इससे दूसरा प्रत्याशी जीत सकता है।
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 151 के तहत चुनाव आयोग को विधानसभा या संसद की ऐसी सीटों पर छह महीने के अंदर चुनाव कराना होता है जहां प्रत्याशी के इस्तीफे या उसकी मौत की वजह से सीट खाली हो जाती है।
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अल्तमस कबीर, न्यायमूर्ति ए. के. पटनायक और न्यायमूर्ति अनिल आर. दवे ने महान्यायवादी जी. ई. वाहनवटी को इस मामले में न्यायालय को सहायता देने का नोटिस जारी किया है।
केंद्र सरकार को यह नोटिस सॉलिसिटर जनरल गोपाल सुब्रह्मण्यम के जरिए दिया गया है।
न्यायालय ने हालांकि कहा, "हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि इस आदेश से चुनाव आयोग द्वारा दो विधानसभा सीटों पर चुनाव कराने के आदेश पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।"
आंध्रप्रदेश के तेलंगाना क्षेत्र की वेमुलवाड़ा और सिरचिला सीटों पर चुनाव होने हैं।
न्यायालय का यह आदेश चुनाव आयोग द्वारा आंध्रप्रदेश उच्च न्यायालय के उस निर्णय को चुनौती देने के बाद आया है जिसमें उच्च न्यायालय ने आयोग को इन दोनों विधानसभा सीटों होने वाले चुनावों को रोकने का आदेश दिया है।
वेमुलवाड़ा और सिरचिला सीटों पर पिछली बार हुए चुनाव के परिणामों पर मुकदमा चल रहा है। मुकदमा चलाने वाले प्रत्याशियों ने न्यायालय में अपील दायर करके इन सीटों को खाली रखने की मांग की है क्योंकि मुकदमें में जीत होने पर उन्हें विजेता घोषित किया जाएगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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