1984 दंगा : फुल्का मामले में अकाल तख्त ने किया हस्तक्षेप

अमृतसर, 22 जुलाई (आईएएनएस)। सिख धर्म के सर्वोच्च संगठन अकाल तख्त ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के मुकदमे लड़ रहे एच.एस. फुल्का के साथ विवाद पर दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीएमसी) के अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना एवं उनके भाई से मंतव्य मांगा है।

अकाल तख्त के प्रमुख (जत्थेदार) गुरबचन सिंह ने आईएएनएस को बताया, "हमने सरना से इस मामले (फुल्का से संबंधित) पर अपना मंतव्य स्पष्ट करने को कहा है। हमें फुल्का का पत्र मिला है। सरना और उनके भाई को अकाल तख्त के समक्ष 26 जुलाई को उपस्थित होने के लिए कहा गया है। सिख समुदाय पूरी तरह फुल्का के साथ है।"

उल्लेखनीय है कि वकील फुल्का ने 26 वर्ष पुराने 1984 के सिख विरोधी दंगे के पीड़ितों को न्याय दिलाने का बीड़ा उठाया था। फुल्का ने बुधवार को दंगा पीड़ितों की वकालत छोड़ने की पेशकश की थी, क्योंकि सरना ने उन पर आरोप लगाया था कि "उन्होंने व्यक्तिगत लाभ के लिए करोड़ों रुपये लिए हैं।"

अकाल तख्त को लिखे पत्र में फुल्का ने कहा है, "ऐसे में मुकदमे लड़ना मेरे लिए संभव नहीं है।"

फुल्का ने यह फैसला तब लिया, जब सरना और उनके भाई हरविंदर ने 17 जुलाई को हुई कमेटी की बैठक में आरोप लगाया कि उन्होंने डीएसजीएमसी से 1.09 करोड़ रुपये लिए हैं।

31 अक्टूबर, 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली की गलियों में भड़के दंगों से खुद प्रभावित रहे फुल्का ने इस आरोप का खंडन किया है।

फुल्का ने आईएएनएस को बताया, "मुझे गहरा आघात लगा है। मैं खुद को अपमानित महसूस कर रहा हूं। यह मेरी ईमानदारी और नि:स्वार्थ सेवाओं पर हमला है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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