आंध्र प्रदेश-महाराष्ट्र सीमा पर तनाव, 4 घायल (राउंडअप)
इस बीच महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले में रविवार को हुई सर्वदलीय बैठक में नायडू से बांध विरोधी आंदोलन वापस लेने और शाम तक राज्य छोड़ देने की मांग की गई। उधर तेदेपा ने सोमवार को आंध्र प्रदेश में बंद का एलान किया है।
महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ नारे लगाते हुए तेदेपा कार्यकर्ताओं ने महाराष्ट्र की सीमा में घुसने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें खदेड़कर आंध्र प्रदेश के आदिलाबाद जिले में वापस भेज दिया। कुछ मीडिया कर्मियों ने भी शिकायत की है कि पुलिस ने उनकी पिटाई की।
नायडू एवं अन्य तेदेपा नेताओं को निषेधाज्ञा का उल्लंघन कर महाराष्ट्र में प्रवेश करने पर शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया गया था। वे गोदावरी नदी पर बन रहे बाबली बांध की तरफ बढ़ रहे थे। तेदेपा नोताओं का आरोप है कि महाराष्ट्र सरकार अवैध रूप से बांध का निर्माण करवा रही है, जबकि इस नदी के पानी पर आंध्र प्रदेश का भी हक है।
बाबली संरक्षण समिति के कार्यकर्ताओं ने तेदेपा नेताओं के विरुद्ध रैली निकाली। स्थिति पर काबू पाने के लिए धर्माबाद में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात हैं।
पुलिस ने बाबली संरक्षण समिति के कार्यकर्ताओं पर उस समय बलप्रयोग किया, जब वे धर्माबाद आईटीआई परिसर में घुसने का प्रयास कर रहे थे, जहां नायडू एवं 74 अन्य नेताओं को हिरासत में रखा गया है।
उल्लेखनीय है कि आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं अन्य नेताओं को धर्माबाद के न्यायिक मजिस्ट्रेट ने शनिवार को दो दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था, क्योंकि उन्होंने जमानत पर रिहाई से इंकार कर दिया था।
तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) ने अपने नेताओं को महाराष्ट्र में गोदावरी नदी के बाबली परियोजना स्थल पर जाने की अनुमति नहीं दिए जाने के विरोध में सोमवार को आंध्र प्रदेश बंद का एलान किया है।
तेदेपा सांसद नामा नागेश्वर राव ने आईएएनएस को फोन पर बताया, "हमने हड़ताल का आह्वान किया है। हमारी मांग है कि महाराष्ट्र सरकार हमें बाबली सहित 13 अन्य परियोजना स्थलों पर मीडिया के साथ जाने की अनुमति दे।"
राव, जिन्हें शनिवार को महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले में पार्टी प्रमुख एन.चंद्रबाबू नायडू के साथ दो दिन की न्यायिक हिरासत में लिया गया था, ने कहा कि हमने जमानत लेने से इंकार कर दिया, क्योंकि हमने कोई अपराध नहीं किया था।
तेदेपा संसदीय दल के नेता राव ने कहा कि वे 23 जुलाई को सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के साथ प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिलकर उन्हें बाबली परियोजना विवाद से अवगत कराएंगे।
तेदेपा नेता ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री आशोक चव्हाण के उस आरोप को खारिज किया कि तेदेपा ने आंध्र प्रदेश के तेलंगाना क्षेत्र में 12 विधानसभा सीटों पर 27 जुलाई को होने वाले उपचुनाव के मद्देनजर यह राजनीतिक यात्रा शुरू की है।
उधर, महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले में रविवार दोपहर को हुई सर्वदलीय बैठक में मांग की गई कि तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) के अध्यक्ष एन.चंद्रबाबू नायडू बांध विरोधी आंदोलन वापस लें और शाम तक राज्य छोड़ दें।
तेदेपा के अक्रामक रुख के समान ही रवैया अपनाते हुए नांदेड़ से सांसद भास्कर खतगांवकर ने कहा कि यदि नायडू महाराष्ट्र के लोगों की भावनाओं का आदर करने में विफल रहे तो सोमवार को धर्माबाद कस्बे में बंद रखा जाएगा।
तेदेपा के इस कदम को राजनीतिक करतबबाजी बताते हुए खतगांवकर ने जानना चाहा कि आंध्र प्रदेश का मुख्यमंत्री रहने के दौरान नायडू ने यह मुद्दा क्यों नहीं उठाया।
बाबली बांध कार्य समिति की ओर से बैठक आयोजित करने वाले नांदेड़ के विधायक ओमप्रकाश पोकरना ने आरोप लगाया कि तेदेपा राजनीतिक लाभ के लिए महाराष्ट्र की शांति को भंग करना चाहती है। उन्होंने नायडू और उनके 74 समर्थकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग राज्य सरकार से की।
नायडू और उनके 74 समर्थकों को शुक्रवार को निषेधात्मक आदेशों का उल्लंघन करने और महाराष्ट्र में प्रवेश करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तार लोगों में अधिकतर वर्तमान और पूर्व विधायक तथा सांसद हैं।
पोकरना ने आरोप लगाया कि आंध्र प्रदेश के तेलंगाना क्षेत्र में 27 जुलाई को उपचुनावों की घोषणा को देखते हुए तेदेपा राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास कर रही है।
नायडू और उनके समर्थकों ने जमानत लेने से इंकार कर दिया और वे सोमवार तक न्यायिक हिरासत में हैं।
तेदेपा के आंदोलन के विरोध में धर्माबाद कस्बे में शनिवार को बंद रहा। मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण के गृह जनपद नांदेड़ में सोमवार को एक और बंद का खतरा दिख रहा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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