हिंसा की स्वतंत्र जांच का निर्णय

हिंसा की स्वतंत्र जांच का निर्णय

अल्ताफ़ हुसैन

बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर

भारतीय कश्मीर में मुख्यमंत्री की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में हाल की हिंसा में मारे गए आम नागरिकों के मामले की स्वतंत्र जांच का निर्णय लिया गया है.

लेकिन इस मामले पर आम सहमति नहीं बन पाई क्योंकि भारतीय जनता पार्टी का कहना था कि इससे सुरक्षाबलों के मनोबल पर बुरा असर पड़ेगा.

बैठक में पारित प्रस्ताव में ये भी तय हुआ कि एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री से मुलाक़ात करेगा और उन्हें राज्य की समस्याओं से अवगत कराया जाएगा.

इस बैठक में मुख्य विपक्षी दल पीडीपी की नेता महबूबा मुफ़्ती नहीं शामिल हुईं.

प्रस्ताव में भारत सरकार से अनुरोध किया कि शांति वार्ता प्रक्रिया को मज़बूत किया जाए.

इसमें कहा गया है कि इसके लिए देश के अंदर और बाहर दोनों ही जगह बातचीत को शुरू करने की ज़रूरत है.

राज्य के कई नेताओं का कहना है कि हाल के दिनों की हिंसा की वजह शांति प्रक्रिया में आई रूकावट है क्योंकि इससे नौजवानों में निराशा बढ़ी है.

बैठक के बाद जारी प्रस्ताव में हिंसा में मारे गए लोगों के प्रति शोक व्यक्त किया गया और सरकार से मृतकों के परिवारजनों के लिए उचित मुआवज़े की मांग की गई.

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने राज्य में शांति की अपील की है.

वहीं राज्य में लगातार आठवें दिन दुकानें बंद रहीं और जनजीवन अस्तव्यस्त रहा.

बारामूला में प्रदर्शन कर रही भीड़ पर सुरक्षा बलों ने गोली चलाई जिसमें एक बारह साल का बच्चा पैर में गोली लगने से घायल हो गया.

कुछ अन्य जगहों पर भी भीड़ पर काबू पाने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग किया लेकिन कुल मिलाकर घाटी में शांति रही.

श्रीनगर के पुराने इलाकों में अभी भी अघोषित कर्फ़्यू लागू है.

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