आम आदमी की कमर तोड़ रहे दूध के दाम
जनवरी 2007 से मार्च 2010 के बीच दिल्ली में दूध के दाम सात बार बढ़े। पिछले एक साल में दूध के दाम 17 रुपए प्रति लीटर से बढ़कर 22 रुपए प्रति लीटर हो गए। पहले दालें महंगी हुईं और अब दूध ने लोगों की कमर तोड़ दी है। सीआईआई ने इस पर चिंता जाहिर करते हुए कहा है कि दूध का सबसे बड़ा उत्पादक होते हुए भी भारत में दाम बढ़ने के पीछे इसकी डिमांड का बढ़ना है। 50 लाख टन दूध की जरूरत है, जबकि देश में दूध सिर्फ 32 लाख टन उपलब्ध है।
सीआईआई की रिपोर्ट के मुताबिक 2009 में उत्तर भारत में पड़े सूखे का भी इस पर खासा असर पड़ा है। इससे न केवल अनाज के दामों पर असर पड़ा बल्कि दूध के दाम भी प्रभावित हुए।
सीआईआई ने सरकार को सुझाव दिया है कि दूध के दाम घटाने के लिए कड़े कदम उठाए जाने चाहिए। दूध के दाम कम करने के लिए चारे का उत्पादन बढ़ाया जाए। दूध देने वाली गायों व भैंसों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए उनके खान-पान की गुणवत्ता पर खास ध्यान देने की जरूरत है। दूध देने वाली गायों व भैसों के मांस बेचने पर तुरंत रोक लगाई जानी चाहिए। इसके अलावा दूध के ट्रांसपोर्टेशन और स्टोरेज को गुणवत्ता परक बनाकर दूध के दाम कम किए जा सकते हैं।













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