पाकिस्तान में अभी भी हराम है परिवार नियोजन
इस्लामाबाद, 12 जुलाई (आईएएनएस)। पाकिस्तान में अनियोजित गर्भधारण उफान पर है। इसके साथ ही प्रति वर्ष गर्भपात के 900,000 मामले सामने आ रहे हैं। यहां तक कि अधिकांश पाकिस्तानी नागरिक यह कहते हैं कि परिवार नियोजन के सवाल पर उन्हें शर्म महसूस होती है।
पाकिस्तान सरकार ने दो दशक पहले एक विशेष अभियान चलाया था 'दो बच्चे का सुखी परिवार', ताकि देश के सभी लोगों के लिए पर्याप्त भोजन, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधा, सामाजिक कल्याण और रोजगार के अवसर मिल सकें।
सरकार ने एक परिवार नियोजन परियोजना भी शुरू की थी और महिलाओं को अनियोजित गर्भाधान से बचने के लिए सलाह देने हेतु प्रत्येक गांवों में महिला स्वास्थ्य निरीक्षक की नियुक्ति की थी। जनसंख्या मंत्रालय भी इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया के जरिए विभिन्न अभियान चला रहा है। अभियान में लोगों को सिखाया जाता है कि किस तरह अनियोजित प्रसव से बचा जा सकता है।
फैमिली प्लानिंग एसोसिएशन ऑफ पाकिस्तान द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़े के अनुसार वर्ष 1960 के दशक में पाकिस्तान की आबादी पांच करोड़ से कम थी। लेकिन अब पाकिस्तान दुनिया का छठा सबसे अधिक आबादी वाला देश बन गया है। उसकी आबादी 18 करोड़ हो गई है।
धार्मिक विद्वानों का मानना है कि बड़ी आबादी से गरीबी नहीं बढ़ती, बल्कि गरीबी प्रशासन के कुप्रबंधन से बढ़ती है, जब वह संसाधनों का सदुपयोग नहीं कर पाता।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने इस्लामाबाद के एक धार्मिक विद्वान, हाफिज इदरीस के हवाले से कहा है, "खुदा ने इस ब्रह्मांड में जन्म लेने वाले हर किसी के लिए भोजन उपलब्ध कराने का वादा किया है। ऐसे में हम खुदा की अवहेलना कैसे कर सकते हैं।"
इदरीस ने कहा, "सरकार को चाहिए कि वह जनता को सलाह देने के बदले परिणामदायक नीतियों और नए संसाधनों की तलाश करे।"
इस बीच प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने तेजी के साथ बढ़ रही देश की आबादी पर लगाम लगाने के लिए धार्मिक विद्वानों और नेताओं से मदद का आह्वान किया है।
गिलानी ने कहा, "हमारे सामने यह बड़ी चुनौती है। भविष्य में इसके कारण पानी, गैस और भोजन की समस्या और जटिल हो जाएगी।"
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि आबादी की वर्तमान रफ्तार को रोका नहीं गया तो 34 साल बाद पाकिस्तान की आबादी ठीक दोगुनी हो जाएगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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