घग्गर में दरार के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ हो कार्रवाई' (लीड-1)

चण्डीगढ़, 12 जुलाई (आईएएनएस)। हरियाणा सरकार ने सोमवार को कहा कि पंजाब सरकार को उन 'असामाजिक तत्वों' के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई करनी चाहिए जो घग्गर नदी तटबंधों में आईं दरारों के लिए जिम्मेदार हैं और जिन्होंने सूखी सतलज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर में पानी छोड़ा, जिस कारण दोनों राज्यों में बाढ़ आ गई।

पंजाब और हरियाणा के बाढ़ प्रभावित इलाकों में सोमवार को राहत और बचाव कार्य जारी हैं। घग्गर नदी के तटबंधों में आई दरार को पाटने के काम में सेना के जवानों की मदद ली जा रही है।

हरियाणा के सिंचाई मंत्री अजय सिंह यादव ने संवाददाताओं से कहा, "प्रारंभिक जांच में पंजाब क्षेत्र की नदियों और नहरों के तटबंधों में मानव निर्मित दरारें पाई गई हैं।"

उन्होंने कहा, "पंजाब के कुछ असामाजिक तत्वों की कारिस्तानी के कारण हरियाणा में बाढ़ आई, वरना ऐसी नौबत नहीं आती।"

यादव ने कहा कि एसवाईएल नहर की सीमित क्षमता है और अधिक मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण हरियाणा क्षेत्र के तटबंधों में भी दरारें आईं।

उन्होंने कहा, "हम आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर सकते, क्योंकि यह हमारे अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। इसलिए यह पंजाब सरकार का दायित्व है कि वह आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कराए और उन पर कड़ी कार्रवाई करे।"

पंजाब और हरियाणा में एसवाईएल नहर की संयुक्त पहरेदारी के संबंध में यादव ने कहा कि इस मामले पर अभी तक पंजाब का जवाब नहीं आया है। सच तो यह है कि पंजाब ने अपने इलाके की नहर में आई दरारों की भराई नहीं करवाई है।

हरियााणा सरकार के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के सलाहकार आर.एन. पाराशर ने सोमवार को कहा कि एसवाईएल नहर में कटाव संयुक्त पहरेदारी से ही रोका जा सकता है।

सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ रविवार को दोनों राज्यों में एसवाईएल नहर का मुआयना कर चुके पाराशर ने कहा कि कटाव पंजाब के किसानों ने किया, जिस कारण हरियाणा में बाढ़ आई।

उन्होंने कहा, "पंजाब के वरिष्ठ अधिकारियों को समस्या से पहले ही अवगत करा दिया गया है और उन्होंने इस मामले में सहयोग देने का आश्वासन दिया है। हरियाणा सरकार समस्या के परस्पर सम्मति से समाधान के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।"

उधर, मानसा जिले के उपायुक्त कुमार राहुल ने आईएएनएस से कहा, "घग्गर नदी के तटबंधों में आई दरार और पानी के भारी प्रवाह से मानसा जिले के कई गांव पानी में डूब गए हैं। सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि पर पानी भर गया है। समीप के कई गांवों में अभी भी बाढ़ का खतरा है। हमने मदद के लिए सेना से आग्रह किया।"

उन्होंने कहा कि सेना के जवान जिला प्रशासन के साथ काम कर रहे हैं और कटानों को शीघ्र ही बंद कर देने की उम्मीद है।

हरियाणा के फतेहाबाद जिले में भी सेना की मदद मांगी गई है जहां घग्गर नदी के तटबंध में आई दरार से 30 से अधिक गांवों में बाढ़ आ गई।

फतेहाबाद जिले के एक अधिकारी ने बताया कि पानी का बहाव काफी तेज है और करीब 30 गांव बाढ़ से प्रभावित हुए। ग्रामीणों को पैकेटबंद भोजन, पानी और दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

पंजाब के सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने कहा कि नदियों और नहरों में पानी का बहाव खतरनाक स्तर पर है।

पंजाब के मुख्य अभियंता (सिंचाई) अमरजीत सिंह दुल्लत ने आईएएनएस से कहा, "हम बाढ़ की स्थिति पर नजदीकी निगाह रखे हुए हैं। कुछ हिस्सों में पानी का स्तर घटा है लेकिन अन्य स्थानों पर इसका स्तर खतरनाक है। इस समय यह नहीं कह सकते कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। नई दरारों को पाटने का काम जारी है।"

पटियाला, लुधियाना, फतेहगढ़ साहिब, मोहाली और संगरूर जिले के सैकड़ों गांव पिछले हफ्ते आई बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।

बाढ़ से पंजाब से 2.5 लाख एकड़ कृषि भूमि प्रभावित हुई है और 763 गांवों के तीन लाख से ऊपर लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कुल 1,966 किलोमीटर लंबी सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं।

पंजाब में हुई 22 मौतों सहित बाढ़ के कारण अब तक 33 लोगों की मौत हो चुकी है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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