'शहरी आतंकवाद का रूप धारण कर सकता है नक्सलवाद'

वाशिंगटन, 9 जुलाई (आईएएनएस)। अमेरिका के एक प्रमुख रणनीतिक थिंकटैंक ने चेतावनी दी है कि भारत में नक्सली आंदोलन अभी भले ही नियंत्रित लगता है, लेकिन नक्सली नेता और उसके बम निर्माता शहरी आतंकवाद के लिए रणनीति तैयार कर सकते हैं।

भारत के नक्सली खतरे का करीब से आकलन करते हुए स्ट्रैटफॉर ने कहा, "जहां प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने नक्सलवाद के मुद्दे को देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा माना है, वहीं 2008 के मुंबई हमले जैसी घटनाएं अधिकांश भारतीयों को इस बात का सबूत मुहैया कराती हैं कि पाकिस्तान और वहां छुपे आतंकी भारत के लिए एक बड़ा बाहरी खतरा हैं।"

स्ट्रैटफॉर ने कहा, "फिलहाल नक्सलवाद काफी नियंत्रित है। नक्सलियों से पैदा हुए खतरों और इन संकेतों के बावजूद कि वे देश भर में शहरी ठिकानों को निशाना बनाएंगे, इस संगठन ने लाल गलियारे के बाहर अपनी हमलावर क्षमता का प्रदर्शन अभी तक नहीं किया है।"

उसने कहा, "लेकिन संगठन के नेता और उसके बम निर्माता इस तरह की क्षमता विकसित कर सकते हैं, और इस तरह के किसी भी संकेत पर नजर रखना महत्वपूर्ण है कि कहीं नक्सली, शहरी आतंकवाद के लिए कोई योजना तो नहीं बना रहे हैं।"

स्ट्रैटफॉर ने चेतावनी दी है, "नक्सली, विस्फोटक तैयार करने और उन्हें लगाने, सशस्त्र हमला करने और एक व्यापक, फुर्तीला और जिम्मेदार खुफिया तंत्र विकसित करने की क्षमता विकसित कर रहे हैं।"

स्ट्रैटफॉर ने कहा है, "यदि नक्सली अपने निर्धारित लक्ष्य का विस्तार नहीं करते और आतंकियों जैसे हमलों को अंजाम नहीं देते, तो भी राज्य के सामने खड़ी नक्सली चुनौती अन्य रूपों में सामने आ सकती है।"

थिंकटैंक ने कहा है कि नक्सली अपनी ताकत बढ़ाने के लिए सिर्फ आतंकी हथकंडे नहीं अपनाते, बल्कि वे सामाजिक अशांति और राजनीति के हथकंडे भी अपनाते हैं।

स्ट्रैटफॉर ने कहा है, "नक्सलियों ने विश्वविद्यालयों में सहानुभूति रखने वाले विद्यार्थियों का संगठन खड़ा कर रखा है और नई दिल्ली व अन्य क्षेत्रीय राजधानियों में मानवाधिकार संगठन बना रखे हैं। ये सभी संगठन पूर्वी भारत के ग्रामीण इलाकों में स्थानीय जनजातियों के हितों की वकालत कर रहे हैं।"

थिंकटैंक ने कहा है, "ये संगठन हिंसा का इस्तेमाल करने के बदले, राज्य के खिलाफ अपनी शिकायतों को जाहिर करने के लिए विरोध प्रदर्शन आयोजित करते हैं। और वे अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए आतंकी हिंसा और सूक्ष्म सामाजिक दबाव का इस्तेमाल कर नक्सली हिंसा को रेखांकित करते हैं।"

स्ट्रैटफॉर ने नक्सलियों से मुकाबले के लिए सेना की तैनाती के तमाम नेताओं के सुझाव के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा है, "यदि सरकार ने पूर्वी भारत में नक्सलवाद से मुकाबले के लिए सेना की तैनाती का निर्णय ले भी लिया, तो भी उसे एक सुसंगठित आंदोलन का सामना तो करना ही पड़ेगा।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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