बिहार में सूखे की आशंका
आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि अषाढ़ माह बीतने को है और बारिश के आसार नहीं दिख रहे हैं। गया, जहानाबाद, नालंदा, नवादा, औरंगाबाद आदि जिलों के अधिकारियों का कहना है कि पानी के अभाव में खेतों में धान के बीज नहीं डाले गए हैं। जिन इलाकों में धान के बीज डाले गए हैं वे भी पानी के अभाव में सूख रहे हैं।
मौसम विभाग के अनुसार पटना जिले में अब तक 180़ 7 मिलीमीटर वर्षा होनी चाहिए थी लेकिन अब तक मात्र 81़ 2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। नालंदा में सामान्य बारिश की तुलना में 38 प्रतिशत, सहरसा में 22 प्रतिशत, कटिहार में 37 प्रतिशत, मुजफ्फरपुर में 50 प्रतिशत तथा औरंगाबाद में सामान्य वर्षा की तुलना में 68 प्रतिशत ही वर्षा दर्ज की गई है।
मानसून के बेरुखी का आलम यह है कि भागलपुर में 204 मिलीमीटर बारिश के बजाय अब तक केवल 130 मिलीमीटर बारिश हुई है।
कृषि विभाग के अनुसार इस वर्ष अब तक मात्र 2,42,560 हेक्टेयर भूमि की रोपाई के लिए धान के बीज डाले जा सके हैं जबकि लक्ष्य 3,57,500 हेक्टेयर का था। पिछले वर्ष 270000 हेक्टेयर भूमि की रोपाई के लिए धान के बीज डाले गए थे।
आपदा प्रबंधन विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि राज्य में अगर एक सप्ताह तक बारिश नहीं हुई तो सूखे का संकट उत्पन्न हो जाएगा। आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव ब्यासजी के अनुसार राज्य में सूखे का आकलन करने के लिए सरकार ने महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है।
सरकार इस वर्ष भी किसानों को डीजल पर अनुदान देने का विचार कर रही है। सूत्रों के अनुसार कृषि विभाग इसके लिए एक प्रस्ताव भी सरकार को भेजने वाला है। प्रस्ताव के मुताबिक पिछले वर्ष किसानों को प्रति लीटर 15 रुपये अनुदान दिया गया था। इस वर्ष अनुदान 20 रुपये करने का प्रस्ताव है।
पिछले वर्ष सरकार ने पटना, नालंदा, शेखपुरा, भागलपुर, रोहतास, पूर्णिया, भोजपुर, कैमूर, औरंगाबाद, गया समेत 26 जिलों को सूखाग्रस्त घोषित किया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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