जासूसी के आरोप आधारहीन: रूस

जासूसी के आरोप आधारहीन: रूस
अमरीका में रूसी जासूसी ढाँचे की मौजूदगी के आरोप को रूस ने ग़लत और आधारहीन बताया है. रूस ने कहा है कि अमरीका से जो ख़बरें मिल रही हैं उनमें विरोधाभास है.

विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अमरीका से इस बारे में स्पष्टीकरण देने को कहा है. उन्होंने कहा है इस कार्रवाई के लिए जो समय चुना गया है उसमें उन्हें कोई चाल नज़र आती है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ऐसा कहकर रूसी विदेश मंत्री यह संकेत देना चाहते हैं कि अमरीकी प्रशासन में कोई व्यक्ति है जो मॉस्को और वॉशिंगटन के बीच बेहतर होते संबंधों में आती गर्मजोशी को बर्दाश्त नहीं कर पा रहा है.

उल्लेखनीय है कि अमरीका में सोमवार को दस रूसी नागरिकों को गिरफ़्तार किया गया था. इन सभी लोगों पर अमरीकी सरकार के ख़िलाफ़ जासूसी का आरोप लगाया गया है.

अमरीकी अधिकारियों के अनुसार एक व्यक्ति और है जिसकी तलाश की जा रही है. अमरीकी केंद्रीय जाँच एजेंसी (एफ़बीआई) ने कहा है कि इन लोगों पर कई वर्षों से निगाह रखी जा रही थी.

गिरफ़्तार किए गए लोगों में से पाँच को मैनहटन के संघीय अदालत में पेश किया गया. अदालत ने इस मामले की सुनवाई के लिए 27 जुलाई की तारीख़ तय करते हुए, तब तक जेल में रखने के आदेश दिए.

इन पाँच लोगों में एक दंपति है, जिनके नाम रिचर्ड मर्फ़ी और सिंथिया मर्फ़ी बताए गए हैं. इन्हें माउंट क्लेयर से गिरफ़्तार किया गया था. विक्की पेलाएज़ और जुआन लेज़ारो नाम के दो लोगों को न्यूयॉर्क प्रांत के यॉन्कर्स से गिरफ़्तार किया गया जबकि अन्ना चैपमैन को मैनहटन से गिरफ़्तार किया गया.

एक और व्यक्ति मिखाइल सेमेन्को और एक अन्य दंपति माइकल ज़ोटोली और पैट्रिशिया मिल्स को वर्जीनिया के ऑर्लिंगटन से गिरफ़्तार किया गया था. इन्हें सोमवार को ही अलेक्ज़ेड्रिया की अदालतम में पेश किया गया.

एक और दंपति डोनल्ड हॉवर्ड हीथफ़ील्ड और ट्रेसी ली एन फॉली को बोस्टन में गिरफ़्तार किया गया था और उन्हें शहर में ही एक संघीय अदालत में पेश किया गया. गिरफ़्तार किए गए सभी लोगों पर षडयंत्र करने और विदेशी सरकार के लिए गैर क़ानूनी रुप से जासूसी करने का आरोप लगाया गया है.

इनमें से नौ लोगों पर पैसे के हेरफेर का आरोप भी लगा है. जासूसी के आरोप में पाँच साल की सज़ा होती है जबकि पैसे के हेरफेर के आरोप के तहत बीस साल तक की सज़ा हो सकती है.

अदालत में दाखिल कागज़ात के मुताबिक इन कथित जासूसों को रुस की विदेशी इंटेलीजेंस सेवा (एसवीआर) ने ट्रेनिंग दी थी और उन्हें अमरीका की नीति निर्धारक हलकों में पैठ बनाकर जानकारी जुटानी थी.

इनमें से कुछ 90 के दशक से ही फर्ज़ी नामों पर अमरीका में रह रहे थे और कंप्यूटर के ज़रिए इंटरनेट पर फोटो और जानकारियां भेजा करते थे. जांचकर्ताओं के अनुसार इनमें से कुछ जासूस एक वैज्ञानिक के काफ़ी निकट हो चुके थे जो बंकर नष्ट करने वाले बम बनाने की जानकारी रखते हैं. इसके अलावा ये जासूस एक पूर्व गुप्तचर अधिकारी से संपर्क में भी थे.

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