असम के आतंक पीड़ितों ने न्याय की मांग की
गुवाहाटी, 29 जून (आईएएनएस)। डेजी कलिता क्रोध से कांपते हुए आतंकियों और प्रतिबंधित युनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) के नेताओं के लिए कड़ी सजा की मांग करती हैं। गिडगिड़ाते हुए वह कहती हैं कि उनके पति के हत्यारे को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाना चाहिए।
डेजी ने आंसू भरी आंखों से कहा, "मैं नहीं समझती कि उल्फा के लोगों को माफी दी जा सकती है। उन्हें कड़ी सजा मिलनी चाहिए। सरकार उन्हें बगैर किसी सजा के छोड़ कर हमारी भावनाओं को ठेस न पहुंचाए।"
डेजी ने अपने पति अजय कलिता को मार्च 2002 में खो दिया था। उल्फा के आतंकियों ने पश्चिमी असम के बारपेटा जिले में सारूपेटा गांव में उन्हें उनके घर के पास गोली मार दी थी। अजय कलिता व्यापारी थे।
डेजी ने आईएएनएस को बताया, "जब आतंकियों ने मेरे पति की हत्या की तो उस समय मेरा बेटा मात्र पांच साल का था।"
बारपेटा जिले के सोरभोग गांव की मंजूबाला भी इसी तरह उल्फा से पीड़ित हैं। उनके पति माणिक दास को 2003 में उल्फा ने उस समय गोलियों से भून दिया था, जब वह ड्यूटी पर थे। दास पुलिस कांस्टेबल थे।
मंजूबाला ने कहा, "मैं न्याय चाहती हूं और चाहती हूं कि उल्फा नेताओं को दंडित किया जाए, ताकि हमारी आत्मा को कुछ शांति मिल सके।"
अपने परिजनों को उल्फा के हाथों गंवा चुके लगभग 15 परिवारों ने सोमवार को गुवाहाटी में बैठक की और सरकार से आग्रह किया कि जेल में कैद उल्फा आतंकियों के खिलाफ कानून सम्मत कार्रवाई की जाए। इन सभी ने स्पष्ट मांग की है कि उल्फा आतंकियों को बिना मुकदमा चलाए जेल से नहीं छोड़ा जाना चाहिए।
पीड़ित परिजनों की यह अपील ऐसे समय में आई है, जब नई दिल्ली के साथ राजनीतिक बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए जेल में कैद उल्फा नेताओं को रिहा किए जाने की चर्चा होने लगी है।
ब्रोजेन हजारिका ने कहा, "हम सरकार के साथ उल्फा नेताओं की शांति वार्ता के विरोधी नहीं हैं। हम सिर्फ यह चाहते हैं कि उनके नेताओं को दंडित किया जाना चाहिए।"
ब्रोजेन के छोटे भाई कुमुद को उल्फा आतंकियों द्वारा अगवा कर लिया गया था और उसके अंग काट दिए गए थे और आंखें फोड़ दी गई थीं। उसके बाद उसे लखीमपुर जिले के बिहपुरिया गांव में एक गड्ढे में फेंक दिया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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